नैवेल आर्किटेक्चर

कोर्स, एडमिशन, जॉब, सैलरी, करियर

By अजय मिश्रा

नैवेल इंजीनियरिंग क्या है 

नैवेल आर्किटेक्चर का यह 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम मूलतः इंजीनियरिंग एवं डिज़ाइन के समायोजन से विभिन्न  युद्ध पोतो अथवा वॉर क्राफ्ट के निर्माण से सम्बंधित है | सभी प्रकार के समुद्री परियोजनाए , जहाज एवं सबमरीन आदि के  निर्माण, व  मरम्मत इत्यादि के कार्य इसमें सम्मिलित है | आज के परिवेश में जहाँ व्यावसायिक एवं सैनिक परिवहन संसाधनों का महत्त्व प्रत्यक्ष है वही अधिक क्षमता एवं उपयोगिता वाले समुद्री जहाजों की प्रासंगिकता भी बढ़ी है | नैवेल आर्किटेक्चर अथवा नैवेल इंजीनियरिंग दरअसल ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग या एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के समान ही इंजीनियरिंग की एक शाखा है जो इंजीनियरिंग के विभिन्न  क्षेत्र जैसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर एवं   सेफ्टी इंजीनियरिंग  के अवयवों को समाहित कर के शिप बिल्डिंग एवं ऑफ शोर स्ट्रक्चर के लिए डिज़ाइन, निर्माण एवं मेंटेनेंस आदि का प्रशिक्षण देती है, जिसमें बड़े जहाजों के अतरिक्त सबमरीन,पॉवर बोट, स्टीमर, टग्स, बार्ज,युद्ध पोत,आइस ब्रेकर आदि के साथ समुंद्र में तैरने वाले बड़े निर्माण शामिल रहते हैं।  नेवल आर्किटेक्चर का  समुद्री पोर्ट एवं मशीनी संसाधनों के  क्रमागत उन्नति में  काफी पुराना  योगदान रहा है, कुछ एक निर्माण जो बेहद मूल्यवान एवं जटिल इंजीनियरिंग से निर्मित हैं इसी क्षेत्र के विशेषग्यताओं के परिणाम हैं। इंजीनियरिंग की यह शाखा ना केवल समुद्री गतिविधियों जैसे तलकर्षण( ड्रेडिंग), ऑफशोर ड्रिलिंग एवं ट्रांसपोर्टेशन तक ही सिमित है अपितु यह रीसर्च, डिज़ाइन बिल्डिंग के साथ आर्थिक साध्यता(फिजिबिलिटी) एवं सुरक्षा आदि विषयों पर भी अपना नियंत्रण रखती है।

कई अवसरों पर नेवल इंजीनियरिंग एवं मरीन इंजीनियरिंग को एक ही समझ लिया जाता है जबकि इन दोनों में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। नैवेल आर्किटेक्ट अथवा नैवेल इंजीनियर विभिन समुद्री संरचनाओं के निर्माण,डिज़ाइन से जुड़ा होता है जिसमें  उसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के इस्तेमाल के साथ प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक लेआउट, रेसिस्टेन्स एंड पॉवरिंग,हाइड्रोस्टेटिक, स्ट्रेंथ एवं SOLAS (सेफ्टी ऑफ़ सी लाइफ) आदि विषयों पर नियंत्रण रखना होता है। जबकि मरीन इंजीनियर शिप या सबमरीन के प्रयोग के समय उत्पन्न समस्याओं एवं कार्य प्रणाली के सुरक्षित संचालन से सम्बंधित होता है। एक मरीन इंजीनियर शिप में उपयोग होने वाले सभी इंजीनियरिंग सिस्टम एवं अवयवों से परिचित होता है, साधारणतः किसी शिप का चीफ इंजीनियर एक ग्रेजुएट मरीन इंजीनियर ही होता है। 

नैवेल आर्चिटेक्टचर एवं शिप बिल्डिंग इंजीनियरिंग सब्जेक्ट

मरीन इंजीनियरिंग का कोर्स मौलिक रूप से विभिन्न मरीन वेसल्स , एवं समुद्री जहाज के डिज़ाइन व रख रखाव से सम्बन्धी होता है, इसके 8 सेमेस्टर में विभिन्न विषय जैसे फ्लूइड डायनामिक्स, ओसियन इंजीनियरिंग , इंजीनियरिंग ड्राइंग एंड ग्राफ़िक्स, हाइड्रोस्टैटिक्स एंड स्टेबिलिटी  कोस्टल इंजीनियरिंग , डायनामिक्स ऑफ़ ऑफ शोर स्ट्रक्चर , प्रिंसिपल ऑफ़ नैवेल आर्किटेक्चर, डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग, शिप डिज़ाइन  आदि का विस्तृत अध्ययन कराया जाता है। इसके अतिरिक्त कैंडिडेट को विभिन्न कम्पनीओ द्वारा प्रस्तावित इंटर्नशिप प्रोग्राम में भी  भाग लेना होता है जहां इन्हे व्यावहारिक स्तर पर डिज़ाइन एवं विश्लेषण की ट्रेनिंग दी जाती है।

नैवेल आर्चिटेक्टचर एवं शिप बिल्डिंग इंजीनियरिंग सिलेबस

B.Tech नैवेल आर्किटेक्ट के कोर्स में अधिकांश कॉलेजों में आयोजित  सिलेबस इस प्रकार है

सेमेस्टर 1

मैथमेटिक्स -1

केमिस्ट्री

केमिस्ट्री लेबोरेटरी

मैकेनिक्स इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी

इलेक्ट्रिकल टेक्नोलॉजी लेबोरेटरी

इंगलिश फॉर कम्युनिकेशन

इंजीनियरिंग ड्राइंग एंड ग्राफ़िक्स वर्कशॉप

प्रैक्टिस EAA

सेमेस्टर 2

मैथमेटिक्स -2

फिजिक्स

फिजिक्स लेबोरेटरी

प्रोग्रामिंग एंड डाटा स्ट्रक्चर

प्रोग्रामिंग एंड डाटा स्ट्रक्चर लेबोरेटरी इंजीनियरिंग ड्राइंग एंड ग्राफिक्स वर्कशॉप

प्रैक्टिस फ्लूइड डाइनामिक्स

इंट्रोडक्शन तो नैवेल आर्किटेक्चर

सेमेस्टर – 3

मैथमेटिक्स -3

थर्मोडायनामिक्स

बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स

इलेक्ट्रॉनिक्स लेबोरेटरी

हाइड्रोस्टैटिक्स एंड स्टेबिलिटी मरीन

हाइड्रोडाइनामिक्स

सेमेस्टर-4

 मशीन डिज़ाइन

 एलिमेंट्स ऑफ़ ओसियन इंजीनियरिंग

 रेसिस्टेन्स एंड प्रोपल्शन

 मरीन कंस्ट्रक्शन एंड वेल्डिंग मरीन

 स्ट्रक्चर -1

 मरीन स्ट्रक्चर कम्प्यूटेशन

 हाइड्रोस्टैटिक्स एंड स्टेबिलिटी कैलकुलेशन

सेमेस्टर 5

हॉस्पिटल मैनेजमेंट

मरीन स्ट्रक्चर 2

मोशन एंड कण्ट्रोल

मरीन डिज़ाइन -1

मरीन प्रोडक्शन

मरीन मटेरियल हाइड्रोडाइनामिक्स लेबोरेटरी

सेमेस्टर-6

डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग

 मरीन डिज़ाइन 2

 मरीन सिस्टम

कंप्यूटर ऐडेड

 डिज़ाइन एंड प्रोडक्शन

 इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट इलेक्टिव  1

 मरीन सिस्टम लेबोरेटरी

 CAD-एंड प्रोडक्शन लेबोरेटरी

सेमेस्टर 7

पैटर्न रिकग्निशन एंड आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस

इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग

शिप डिज़ाइन प्रोजेक्ट

बिज़नेस फंडामेंटल एंड इकोनॉमिक्स

वाइब्रेशन एंड नॉइज़

वाइब्रेशन एंड नॉइज़  लेबोरेटरी

मरीन पॉवर प्लांट कम्प्रेहैन्सिव

विवा वोस

सेमेस्टर 8

प्रोजेक्ट

 विवा वोस

 फिजिकल ओसियनग्राफी

 सेमिनार

 इलेक्टिव 2

इलेक्टिव 3

ऑटोमेशन एंड कण्ट्रोल थ्योरी

नैवेल आर्चिटेक्टचर एवं शिप बिल्डिंग इंजीनियरिंग एडमिशन

नेवल इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए  आयोजित होने वाले प्रतियोगी परीक्षा के लिए अभ्यर्थी के पास 10 +2 /सीनियर सेकंडरी एग्जाम के  उसके मूल विषय, फिजिक्स केमिस्ट्री एवं मैथ में  न्यूनतम 60 % अंको का होना आवश्यक है , एवं  कक्षा 12 या फिर 10  में अंग्रेजी विषय में न्यूनतम 50 % अंको की भी अनिवार्यता है |इसके अतिरिक्त अभ्यर्ती को शारीरिक जाँच की एक  प्रक्रिया भी पूरी करनी होती है जहां उसके शारीरिक एवं मानसिक क्षमता की परीक्षा की  जाती है | यद्यपि इस कोर्स का संचालन कुछ सीमित यूनिवर्सिटीज एवं राज्यो के इंस्टिट्यूट द्वारा ही किया जाता है जिन्हे ABET( एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जो की एक वैश्विक स्तर की U.S.एक्रेडेटेर संस्था है ) द्वारा मान्यता प्राप्त है |

हमारे देश में इस क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम इस प्रकार है :-

1 MERI: मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट एंट्रेंस टेस्ट 

2 AIEEE: आल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम

3 IMU CET: इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट

4 AICET: आल इंडिया कॉमन एंट्रेंस टेस्ट  &

5 IIT JEE एंट्रेंस एग्जाम ।

इस  कोर्स के लिए लाटेरल एंट्री द्वारा भी कुछ कॉलेज सीधे सेकण्ड ईयर में दाखिला लेते है, जहां कैंडिडेट के पास  3 वर्षीय डिप्लोमा 60 % से 70 % अंको के साथ अपेक्षित होता है ।  ऐसे कैंडिडेट जिन्होंने मेकैनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की हो वे भी ग्रेजुएट मरीन इंजीनियरिंग (GME) के एक वर्षीय स्पेशलाइज्ड कोर्स द्वारा लाइसेंस प्राप्त कर के मर्चेंट नेवी में एंट्री ले सकते है।  इसके अतिरिक्त  डिस्टेंट लर्निंग  मोड में भी यह  कोर्स ( 6 वर्षीय )  यशवंत राव चह्वाण महाराष्ट्रा ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जाता है ।

इस क्षेत्र में B.TECH करने के लिए कुछ  प्रमुख संसथान इस प्रकार है :-

तोलानी मेरीटाइम इंस्टिट्यूट पुणे,

वेल्स अकादमी चेन्नई,

महाराष्ट्रा इंस्टिट्यूट ऑफ़ नैवेल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग  पुणे, 

मोहम्मद साथाक इंजीनियरिंग कॉलेज  तमिलनाडु,,

 कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग विशाखापत्तनम  आंध्र प्रदेश,

चेन्नई स्कूल ऑफ़ शिप मैनेजमैंट  तमिलनाडु ,

मरीन इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट कोलकाता, 

IIT मुंबई  & IIT खड़गपुर  |

नैवेल आर्चिटेक्टचर एवं शिप बिल्डिंग इंजीनियरिंग जॉब एवं करियर

नेवल आर्किटेक्चर इंजीनियर के लिए सरकारी एवं प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में जॉब की पर्याप्त संभावनाएं उपलब्ध रहती हैं। उदाहरण के लिए

 पब्लिक सेक्टर शिप यार्ड जैसे

1 . माजागाओं डॉक शिप बिल्डर लिमिटेड

2 . गार्डन रीच शिप बिल्डर लिमिटेड

3 .कोचीन शिप यार्ड लिमिटेड

4 .गोवा शिप यार्ड लिमिटेड

5 .हिंदुस्तान शिप यार्ड लिमिटेड आदि।

 इसी प्रकार प्राइवेट सेक्टर के शिप यार्ड्स हैं

1 . लार्सन एंड टर्बो शिप बिल्डिंग

2 . रिलाएंस डिफेन्स इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड

3 . तेबमा शिप यार्ड्स लिमिटेड

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य फर्म्स भी हैं जैसे

वेदम डिज़ाइन,  एरीज मरीन कंसलटेंट,  मरीन टेक,  कन्सेप्टिआ आदि

ABET द्वारा रेकग्नाइज़्ड कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के साथ साथ ज्यादातर स्टूडेंट “फंडामेंटल ऑफ़ इंजीनियरिंग एग्जाम ” में भी भाग लेते है जहां इन्हे बतौर प्रोफेशनल इंजीनियर का लाइसेंस प्रदान किया जाता है। एक अन्य एग्जाम,  NCEES प्रिंसिपल एंड प्रैक्टिस ऑफ़ इंजीनियर(PE) का भी आयोजन होता है जिसे  ग्रेजुएशन के बाद के 4 वर्षो के वर्क एक्सपेरिएंस प्राप्त इंजीनियर के लिए डिज़ाइन किया गया है।  

नैवेल आर्चिटेक्टचर एवं शिप बिल्डिंग इंजीनियरिंग सैलरी

हमारे देश में नैवेल आर्किटेक्चर इंजीनियर की औसत सैलरी  लगभग ₹650 ,000 है।  हालाँकि इस क्षेत्र में विभिन्न संस्थानों द्वारा ऑफर किये जाने वाले विभिन्न पद पर भी इनकी सैलरी निर्भर करती है।

जैसे पोर्ट मैनेजर के पद पर इनकी आरम्भिक सैलरी ₹1,44,000-2,40,000 प्रति वर्ष होती है जबकि चीफ इंजीनियर के पद पर इन्हे लगभग  ₹12,00 ,000 प्रति वर्ष ऑफर किया जाता है