मेडिकल

मेडिकल का क्षेत्र MBBS, BAMS या BDS के अतिरिक्त अनेकों  पैरामेडिकल कोर्सेज तक विस्तृत है जो जॉब की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं। एक बड़ी संख्या में विदेशो से MBBS करने का चलन भी हमारे युवाओं को आकर्षित करता है। 

हमारे देश में सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 532 हैं जिनमे लगभग 76928 सीट्स हैं। इन कॉलेजों में 41388 सीट्स के साथ 272 सरकारी कॉलेज हैं और 35540 सीट्स के साथ 260 निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या है।

मेडिकल एंड हेल्थ केयर इंडस्ट्री में करियर बनाने के लिए बैचलर ऑफ़ फार्मेसी की डिग्री एक गेट-वे की तरह है जहां फार्मास्यूटिकल, फार्माकोलॉजी,फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, एवं फार्माकोग्नॉसी का अध्ययन बतौर कोर सब्जेक्ट किया जाता है|  

करियर एवं रोजगार के अतिरिक्त सामाजिक उपयोगिता के दृस्टि से भी ये कोर्सेस अद्भुत हैं। सभी स्तर के शहर अथवा गाँव में भी इनके लिए रोजगार सहज ही सुलभ है। 

MBBS की पढाई आम तौर पर काफी महंगी समझी जाती है परन्तु सरकारी क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सब्सिडी के कारण यह मेघावी क्षात्रों के लिए सहज ही सुलभ है।

विदेशों से डॉक्टरी की पढ़ाई हमारे देश में कोई नई बात नहीं है, परन्तु संचार एवं यातायात में बदलाव के बाद यह और भी सुलभ हो गया है। अब एक बड़ी संख्या में युवा इस विकल्प को अधिक सरल समझते हैं। 

 देश के सभी 300 डेंटल कॉलेजों के लगभग 26000 सीट्स उपलब्ध हैं जिनमे गवर्नमेंट एवं प्राइवेट कॉलेज दोनों ही शामिल हैं, इन सीट्स का आवंटन काउंसलिंग के प्रक्रिया द्वारा करायी जाती है। 

देश में BAMS कोर्स के लिए सरकारी एवं निजी कॉलेजों की कुल संख्या केवल 247 है जिनमे 320 सीट्स गवर्नमेंट कॉलेजेस में एवं 2430 सीट्स प्राइवेट कॉलेजेस में उपलब्ध हैं। 

कमिंग सून

निर्णय में सावधानी क्यों ?

उच्च शिक्षा एवं बाद के व्यावहारिक जीवन में निरंतर प्रगति करने के लिए अपने रूचि के अनुरूप विषय का चुनाव महत्वपूर्ण होता है।