मैकेनिकल इंजीनियरिंग

कोर्स, एडमिशन, जॉब, सैलरी, करियर

By अजय मिश्रा

मैकेनिकल इंजीनियरिंग परिचय

वैसे तो मैकेनिकल इंजीनियरिंग का इतिहास हजारों  साल पुराना है लेकिन  प्रोफेशनल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इसकी स्थापना 18वी शताब्दी में यूरोप के इन्डस्ट्रीअल रिवोल्युशन के समय में ही हुई। वर्ष 1847 में प्रथम ब्रिटिश  प्रोफेशनल सोसाइटी ऑफ़   मैकेनिकल इंजीनियरिंग ने इसे इंस्टीटूशन ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के रूप में स्वीकार किया। इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विस्तृत एवं  पुरातन होने के साथ ही यह इंजीनियरिंग के विभिन्न विषयों को जैसे सिविल इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग, मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग, एवं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग को भी अपने में शामिल करता है। 

मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स  में मूलरूप से बड़े उपकरणों व मशीनों  के कार्य करने की प्रणाली पर अध्ययन कराया जाता है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग फिजिक्स, मटेरियल साइंस एवं इंजीनियरिंग के सिद्धांतो के आधार पर विभिन्न मैकेनिकल सिस्टम जैसे जेनेरेटर, ट्रांसफार्मर, इलेक्ट्रिक मोटर, ऑटोमोबाइल, एयरक्राफ्ट इत्यादि  के डिज़ाइन, निर्माण, विश्लेषण एवं  रख रखाव आदि विषयों पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाता है।ऐसे विद्यार्थी जिन्हें मशीनरी, फंक्शन, रोबोटिक, मटेरियल साइंस,माइक्रो डिवाइस,वेपन्स डिज़ाइन, एयरक्राफ्ट, जहाज इत्यादि के निर्माण में रूचि हो एवं जिन्हें समस्याओं का व्यवहारिक समाधान प्राप्त करने एवं अपने आईडिया को रियल्टी में बदलने की क्षमता हो उन्हें अवश्य ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग करियर बनाना चाहिए।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स

 

अंडर ग्रेजुएट स्तर पर स्टूडेंट का परिचय प्राम्भिक रूप से मैकेनिकल इंजीनियरिंग के कुछ  बुनियादी विषय जैसे स्टैटिक एंड डायनामिक्स,थर्मोडाइनामिक,फ्लूइड डाइनामिक,स्ट्रेस एनालिसिस, मैकेनिकल डिज़ाइन, एवं टेक्निकल ड्राइंग इत्यादि से कराया जाता है, परन्तु आगे चल कर ये विशेषज्ञता वाले विषय जैसे व्हीकल डिज़ाइन, रोबोटिक्स, नैनो टेक्नोलॉजी आदि के इंजीनियरिंग स्किल्स में परिणित हो जाता है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग सब्जेक्ट्स जो अधिकांश कॉलेजों में पढ़ाया जाता है उनमे स्ट्रेंथ ऑफ़ मटेरियल, थर्मोडाइनामिक, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, फ्लूइड मैकेनिक्स, हीट एंड मास ट्रांसफर,थ्योरी ऑफ़ मशीन, IC इंजन, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग पावर प्लांट इंजीनियरिंग,  रेफ्रिजरेटर एंड एयर कंडीशनिंग आदि का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स में जिन विषयों का अध्ययन किया जाता है उनका संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है |

  • मैटेरियल साइंस : इसमें धातु (metals) की रचना एवं मज़बूतीं  से सम्बंधित विषय  शामिल होते हैं।
    • मैकेनिक्स ऑफ़ सॉलिड : यहां  सॉलिड मैटेरियल के प्रकृति का अध्ययन किया जाता है विशेष रूप से इस पर होने वाले बल प्रयोगो  से उत्पन्न प्रभावों का विश्लेषण किया जाता है।
    • मैन्युफैक्चरिंग साइंस : ये वस्तुओं के डिज़ाइन,लेथ मशीन एवं गियर आदि का विज्ञान है। .
  • इंटरनल कॉमबसटन इंजन : सभी प्रकार के इंजन उनकी व्यवस्था या आयोजन, टार्क एवं BHP आदि। 
  • फ्लूइड मैकेनिक्स : साधारण पाइप से ले कर थर्मल प्लांट में प्रवाहित होने वाले द्रव या तरल पदार्थो के प्रकृति एवं उसके नियंत्रण के सम्बन्ध में सभी कुछ इस विषय में शामिल होते हैं।
  • कायनेमेटिक्स  ऑफ़ मशीन : यह मशीन के गति(MOTION) से सम्बंधित विषय है जहां विद्यार्थी मशीन के चलने एवं उस पर लगने वाले विभिन्न बलों  की समीक्षा करते हैं।
  • मशीन डिज़ाइन : इसमें मशीन से सम्बंधित विभिन्न अवयव जैसे बोल्ट, पूली, नट, शाफ़्ट इत्यादि के बनावट की चर्चा की जाती है। 
  • ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग : यहां किसी  वाहन के गतिविज्ञान उसके मौलिक पुर्जे एवं सड़क पर उसके स्थिरता का निर्धारण करने जैसे विषयों का अध्ययन किया जाता है। 
  • पॉवर प्लांट इंजीनियरिंग  : यह पॉवर प्लांट के विस्तृत क्षेत्र से सम्बंधित विभिन्न विषयों का अध्ययन  है।
  • हीट मास एंड ट्रान्सफर :यह ऊष्मा के प्रवाह एवं उसके कारक तत्वों के लिए जाना जाता है।
  • रेफ्रिजरेटर : इस विषय में  रेफ्रिजरेटर के कार्य करने की तकनीक एवं उसकी क्षमता का विश्लेषण किया जाता है।
  • थर्मोडीनमिक्स : यहां थर्मोडीनमिक्स के तीनों सिद्धांतो के आधार पर उसकी उपयोगिता का उल्लेख किया जाता है ।
  • राकेट एंड जेट प्रोपल्शन : राकेट एंड जेट से सम्बंधित सभी कुछ इसमें शामिल किये  जाते हैं।
  • ऑटो कैड/कैड डिज़ाइन : यह सॉफ्टवेयर पर विभिन्न सामग्री को डिज़ाइन करने एवं कल्पना को वास्तविकता में परिणित करने का अभ्यास है।
  • प्रोडक्शन इंजीनियरिंग : प्रोडक्ट  को बनाने के विभिन्न आयामों  का अध्ययन किया जाता है।

 

 

मैकेनिकल इंजीनियरिंग एडमिशन

एडमिशन हेतु शैक्षणिक मानदंड(academic criterion) को तीन कोर्स / प्रोग्राम के लिए  विभाजित किया गया है :-

1 . डिप्लोमा : यह तीन वर्षीय प्रोग्राम है जो 10वी की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद से किया जाता है।

2 . बी टेक : यह 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है जिसे 12वी की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद से किया जाता है यहां  विद्यार्थी के पास किसी भी रेकग्नाइज़्ड बोर्ड द्वारा फिजिक्स, केमिस्ट्री, एवं मैथ में न्यूनतम 60%(कुछ कॉलेजो में 50%) अंको का  होना आवश्यक होता है।  कुछ इंस्टीटूशन डिप्लोमा होल्डर को लैटरल एंट्री द्वारा  डायरेक्ट बी टेक सेकंड ईयर में भी एडमिशन लेते है।    

3 . एम टेक : यह 2 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है जिसे बी टेक के बाद किया जाता है।  इसके अतिरिक्त रिसर्च के क्षेत्र में PhD (डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी) डिग्री भी प्राप्त की जाती है।

बी टेक में एडमिशन के लिए हमारे देश में हर वर्ष विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन किया जाता है जिनमे

JEE(main) व JEE Advanced  https://jeemain.nta.nic.in

BITSAT https://www.bitsadmission.com

UPSEE https://upsee.nic.in/

SRMJEEE www.srmuniversity.ac.in

COMEDK https://www.comedk.org/ इत्यादि कुछ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं हैं।

हमारे देश में मेकेनिकल इंजीनियर कोर्स के लिए कुल 31 NIT कॉलेज है जिनमे 20 पुराने  स्थापित इंजीनियरिंग इंस्टीटूशन हैं जबकि 11 नए स्थापित किये हुए हैं।NIT तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु ),NIT राउरकेला (उड़िशा),NIT सूरथकल (कर्नाटक),NIT वारंगल(तेलंगाना),MNNIT (उत्तर प्रदेश),NIT विश्वेस्वरया (महाराष्ट्र),NIT कालीकट (केरल),SVNIT) (गुजरात), NITसिलचर (असम), एवं NITदुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) आदि इनमें प्रमुख 10 नाम हैं। इसी प्रकार कुल 23 IITs, 20 GFTIs व 24 IIITs कॉलेज हैं जहां इस कोर्स का आयोजन लिया जाता है। 

JEE(main) एवं JEE Advanced में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को NIT,IIT,IIIT के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला मिलता है।वहीं UPSEE(उत्तर प्रदेश ) एवं COMEDK(कर्नाटक) जैसे अनेक राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगी परीक्षाएं भी हैं। कई प्राइवेट कॉलेज जैसे BITSAT, SRMJEEE आदि अपने निजी स्तर पर भी एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं। देश के अधिकांश कॉलेजों में एडमिशन JEE(main) में प्राप्त अंकों के आधार पर भी होता है वहीं कुछ इंस्टीटूशन में डायरेक्ट एडमिशन की भी व्यवस्था होती है । हमारे देश में इस कोर्स के लिए अधिकांश कॉलेजो की औसत फी INR 4 to 10 लाख होती है। इस कोर्स के लिए सरकारी कॉलेजों में औसतन फी  INR 2 से 4 लाख ली जाती है, वही  कुछ प्राइवेट कॉलेजों में इस कोर्स के लिए  में 3 से 6 लाख रूपए तक फी ली जाती है। बी टेक (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) कोर्स में डायरेक्ट एडमिशन, मेरिट अथवा मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से  भी लिया जाता है जिसकी औपचारिकता www.yuvaindia.in के माध्यम से भी पूरी की जा सकती है

मैकेनिकल इंजीनियरिंग जॉब

एक मैकेनिकल इंजीनियर हर प्रकार के इंडस्ट्रीज के लिए फिट माना जाता है, देश अथवा विदेशों के विभिन्न इंडस्ट्रीज में इनकी मांग सदैव बनी रहती है,जहां ये विभिन्न पदों जैसे

  • एकॉस्टिकइंजीनियर : यह ध्वनि और कंपन से जुडी इंजीनियरिंग की शाखा है। वातावरण, इंडस्ट्रीज, ट्रांसपोर्टेशन इत्यादि में ध्वनि/शोर के प्रभावों को नियंत्रित करने में इसकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
  • क्रायोजेनिकइंजीनियर : बहुत कम तापमान पर पदार्थ की उत्पत्ति एवं व्यवहार क्रायोजेनिक इंजीनियर के विषय हैं। इसमें निम्न तापमान पर वायु के द्रवीकरण की प्रक्रिया का विश्लेषण किया जाता है जिससे क्रायोजेनिक इंजन (राकेट प्रोपल्शन) एवं क्रायोसर्जरी जिसमे त्वचा के अनावश्यक उत्तक विशेष रूप से कैंसर सेल्स का उन्मूलन किया जाता है।
  •  ऑटोमोटिवइंजीनियर : ये मूलतः यात्री वाहन जैसे कार ट्रक, बस व मोटर साइकिल के डिज़ाइन अथवा नवीकरण से सम्बंधित कार्यों में विशेषज्ञता रखते हैं। 
  • पॉवर प्लांट इंजीनियर: मैकेनिकल इंजीनियर, एनर्जी इंडस्ट्रीज में उपयोग होने वाले विभिन्न जीवाश्म ईंधन (fossil fuel),पनबिजली, पारंपरिक एवं न्युक्लीअर ऊर्जा के डिज़ाइन एवं ऑपरेशन का कार्य देखते हैं जहां ये ऊर्जा के प्रोडक्शन एवं उसके रूपांतरण के सभी आयामों पर नियंत्रण करते हैं।
  • लुब्रीकेंटइंजीनियर : यहां पेट्रोलियम आधारित प्रोडक्ट जैसे ऑयल अथवा फ्यूल के भंडारण,लदान, सुरक्षा,रख रखाव एवं शिपिंग इत्यादि का कार्य शामिल होते हैं।
  • थर्मल पावर इंजीनियर : यहां इनकी भूमिका विशेषतः विभिन्न मैकेनिकल कम्पोनेंट्स के डिज़ाइन, मैन्युफैचर एवं स्थापना से सम्बंधित विशेष विवरण तैयार करना होता है।
  • रोबोटिक्स इंजीनियर : यहां मेकेनिकल इंजीनियर का कार्य डिज़ाइन विकसित करने से ले कर मेकेनिकल उपकरण व सेंसर की जाँच आदि होती है। रोबोट की भौतिक बनावट इनके क्षेत्र का ही विषय वस्तु होती  है।

सरकारी पब्लिक सेक्टर  के कुछ संस्थानों में जॉब के लिए एंट्री GATE + GD + Interview के माध्यम से होता है वहीं कुछ एक संस्थान  केवल लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के आधार पर भी  चयन करते हैं। अभ्यर्थी के पास बैचलर डिग्री में न्यूनतम 65% एवं 60% SC/ST के लिए होना अनिवार्य होता है।  कुछ प्रमुख संस्थान के नाम इस प्रकार हैं :- गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड(GAIL), भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL),भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड(BPCL), ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन लिमिटेड(ONGC), इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (IOCL),कोल इंडिया लिमिटेड(CIL), नेशनल थर्मल पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (NTPC) इत्यादि।

निजी क्षेत्रों में मैकेनिकल इंजीनियर के लिए जॉब की संभावनाएं अधिकांशतः केमिकल एंड फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री, ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, पावर एंड एनर्जी इंडस्ट्री, कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री, एयरोस्पेस इंडस्ट्री, थर्मल प्लांट एंड गैस टरबाइन मैन्युफैक्चरर, एयर कंडीशनिंग एंड रेफ्रिजरेशन इंडस्ट्री एवं शिपिंग इंडस्ट्री में उपलब्ध रहती हैं।

 

 

मैकेनिकल इंजीनियर सैलरी

हमारे देश में एक मैकेनिकल इंजीनियर की सैलरी 5 लाख से 20 लाख रुपये  प्रति वर्ष तक होती है वही USA एवं कनाडा आदि देशों में इन्हे 50 लाख रूपये  से भी अधिक का पैकेज ऑफर किया जाता है।

कुछ टॉप कम्पनीज जो ग्रेजुएट मैकेनिकल इंजीनियर को प्लेसमेंट ऑफर करती हैं, इस प्रकार हैं :-

मारुती सुजुकी [Rs 645,000 – Rs 1,459,000], लार्सन एंड टॉरबो लिमिटेड [Rs 383,806 – Rs 636,000],टाटा मोटर्स [Rs 584,615 – Rs 801,869],इनफ़ोसिस [Rs 335,730 – Rs 764,240]TCS[Rs 350,000 – Rs 900,000].

 

 

 

 

 

मैकेनिकल इंजीनियर करियर

ग्रेजुएशन के बाद इस क्षेत्र में कई अवसर एवं संभावनाएं उपलब्ध हैं। डिज़ाइन इंजीनियरिंग के अतिरिक्त कई अन्य प्रोफाइल जैसे सर्विस इंजीनियर,प्रोडक्शन इंजीनियर,  क्वालिटी इंजीनियर या सेल्स इंजीनियर आदि अनेकों पदनामों  में कोई एक  अपने रूचि के अनुरूप करियर के लिहाज से चुन सकते हैं। दूसरी तरफ हायर स्टडी के द्वारा करियर को नए उचाईयों तक पहुंचाने के लिए किसी अच्छे संस्थान  से M.Tech या  MBA करने का चुनाव भी कई विद्यार्थियों द्वारा अपनाया जाता है। ऐसे विद्यार्थी जिनमे अच्छी कम्युनिकेशन स्किल हो वे ऑपरेशनल मैनेजमेंट अथवा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में MBA कर सकते हैं। टेक्निकल क्षेत्र में रूचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए M.Tech डिज़ाइन इंजीनियरिंग, M.Techमैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग,M.Tech थर्मल इंजीनियरिंग अथवा M.Tech CAD/CAM इंजीनियरिंग करना उचित रहता है। इसके अतिरिक्त कई रोजगार/जॉब उन्मुख   कोर्सेज हैं जैसे

GTTC : गवर्नमेंट टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर, डिजाइनिंग : SPM, CAM : CNC प्रोग्रामिंग, CAE : स्ट्रक्चर एनालिसिस, क्रैश एनालिसिस, पार्ट एनालिसिस व मोल्ड फ्लो एनालिसिस, CAD : पाइपिंग डिज़ाइन, प्रोडक्ट डिज़ाइन, टूल डिज़ाइन, दिए डिज़ाइन आदि।

गवर्नमेंट ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा भी कई सर्टिफिकेशन कोर्स कराये जाते है जो केवल BE मेकेनिकल इंजीनियर के लिए ही उपलब्ध होते है जैसे

NTTF  नेट्टूर टेक्निकल ट्रैंनिंग फाउंडेशन, IDTR,इंस्टिट्यूट ऑफ़ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च, CIPET सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी

लगभग 3 वर्षो के अनुभव के बाद एवं अपने क्षेत्र में दक्षता होने पर विदेशों में बेहतर सम्भावनाये तालाशी जा सकती है।

 

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