बैचलर ऑफ़ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ़ सर्जरी

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By NICK JOHNSON

हमारे देश में बैचलर ऑफ़ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ़ सर्जरी (MBBS) मेडिकल क्षेत्र का सर्वाधिक लोकप्रिय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम है। एलोपैथिक मेडिसिन पर आधारित चिकित्सा के क्षेत्र में बतौर डॉक्टर के हैसियत से कार्य करने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों के लिए MBBS एक मात्र डेस्टिनेशन माना जाता है। इस प्रोग्राम के अंतर्गत मेडिसिन एवं शरीर रचना विज्ञान (एनाटॉमी) के विभिन्न आयामों के अध्ययन द्वारा, रोगों के सत्यापन से ले कर निवारण तक का प्रावधान किया गया है, जिनमे एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी, फोरेंसिक स्टेट मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी, ओफ्थल्मोलॉजी, ओटोलर्यनोलोजी, आब्सटेट्रिक्स एंड गइनैलोजी इत्यादि शामिल हैं। लगभग 4 वर्ष एवं 5 महीने के अविधि वाले इस अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम में अतिरिक्त 1 वर्ष का इंटर्नशिप अत्यंत ही महत्वपूर्ण होता है जहाँ विद्यार्थी को हॉस्पिटल, मेडिसिन, एवं सर्जरी के क्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। शरीर रचना विज्ञान के गूढ़तम रहस्यो के अनुसंधान के अतिरिक्त यह मानवीय मूल्यों के प्रति करुणा को भी अवसर देता है और  यही कारण है कि इस पेशे को सर्वाधिक प्रतिष्ठित दृष्टि से देखा जाता है। 

MBBS अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के इच्क्षुक विद्यार्थी के पास 10+2 में मुख्य विषय बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री एवं अंग्रेजी में न्यूनतम 50% का होना अनिवार्य निर्धारित है। साथ ही अभ्यर्थियों की आयु सीमा 17 से 25 वर्ष के अंदर होनी चाहिए । हमारे देश में इस कोर्स के लिए एक मात्र प्रतियोगी परीक्षा NEET है। जो प्रति वर्ष दिसंबर से फेब्रुअरी के मध्य विद्यार्थी से एप्लीकेशन फॉर्म ले कर मई के आखरी सप्ताह तक परीक्षा का आयोजन कराती है एवं पुनः जून के प्रथम सप्ताह में परिणाम घोषित  करती है। NEET के नए नियमों के अनुसार हमारे देश के सभी 532 मेडिकल कॉलेजों के लगभग 76928 सीट्स का आवंटन काउंसलिंग के प्रक्रिया द्वारा करायी जाती है। आम तौर  पर NEET को क्वालीफाई करने के लिए  जनरल केटेगरी को  न्यूनतम 134 मार्क्स अथवा 50 पर्सेंटाइल एवं 107 मार्क्स या 40 पर्सेंटाइल SC/OBC/ST के लिए पर्याप्त होता है। परन्तु सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए लगभग 540 मार्क्स अथवा 1000 रैंक की अपेक्षा की जाती है।

 

NEET के कॉन्सेलिंग की प्रक्रिया दो प्रकार से कराई जाती है।  प्रथम “ऑल इंडिया कॉन्सेलिंग” द्वारा  जिसमे प्रत्येक राज्यों के कॉलेजों के 15% सीट्स शामिल होते हैं एवं अभ्यर्थी जिन्होंने NEET क्वालीफाई किया हो वें  देश के सभी कॉलेजों के लिए आवेदन कर सकतें  हैं। “ऑल इंडिया कॉन्सेलिंग” का  नियंत्रण मेडिकल कॉन्सेलिंग कमिटी(MCC) के अधीन होता है जहां वें अभ्यर्थी के मेरिट, केटेगरी, एवं सीट्स की उपलब्धता के आधार पर  आवंटन करते हैं। शेष बचे 85% सीट्स के लिए सभी राज्य “स्टेट काउंसलिंग“ द्वारा अपने अधिवासी (domicile) प्रत्याशियों हेतु काउंसलिंग की प्रक्रिया का आयोजन करते हैं हालाँकि इसमें अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी भाग लेते हैं परन्तु अधिकांश अवसरों पर इन्हे निजी कॉलेजों के सीट्स ही उपलब्ध हो पाते हैं। काउंसलिंग की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यमों द्वारा विभिन्न राज्यों के अपने वेब साइट पर उपलब्ध रहते हैं।

MBBS की पढाई आम तौर पर काफी महंगी समझी जाती है परन्तु सरकारी क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सब्सिडी के कारण यह मेघावी क्षात्रों के लिए सहज ही सुलभ है। फी स्ट्रक्चर के सन्दर्भ में  ऑल इंडिया सीट्स एवं स्टेट कोटा सीट्स के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों के फी में भी काफी भिन्नता होती है. एक तरफ जहाँ ऑल इंडिया सीट्स के अंतर्गत आने वाले सीट्स में  मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली की फी INR 240/- प्रति वर्ष पर सबसे न्यूनतम स्थान पर है वही गोवा मेडिकल कॉलेज पणजी की वार्षिक फी INR  89,500/-  है। हालाँकि ये आकंड़े केवल ट्यूशन फी के सन्दर्भ में है अन्य खर्च जैसे हॉस्टल, रजिस्ट्रेशन इत्यादि इसमें शामिल नहीं हैं | स्टेट कोटा के अंतर्गत आने वाले सरकारी कॉलेजों की फी  स्टेट कौंसिलेंग अथॉरिटी द्वारा तय की जाती है। राज्यों में जहाँ केरल के मेडिकल  कॉलेज की फी INR 4000/- के न्यूनतम स्तर पर है वहीं  महाराष्ट्र में INR 70900/- वार्षिक फी ली जाती है। साधारणतः  राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से MBBS के बाद के कुछ वर्षों तक उस राज्य में ही रह कर सेवा करने का अनुबंध भी कराया जाता है यद्वपि उत्तराखंड में जहाँ लगभग INR 400000/- की वार्षिक फी है ऐसे किसी अनुबंध की अनिवार्यता नहीं है। उत्तर प्रदेश में जहां सामान्य केटेगरी के विद्यार्थियों के लिए वार्षिक फी INR 18000/- है वहीं रिज़र्व कैटेगेरी के लिए INR 9000/- ही निर्धारित की गयी है, शेष सभी राज्यों में सभी केटेगरी के लिए एक सामान फी ही निर्धारित है। एक अन्य “NRI (नॉन रेज़िडेंट इंडियन) कोटा” के अंतर्गत भी गवर्नमेंट कॉलेजेस में सीट आरक्षित रहती है जिसकी फी 20000 USD(यूनाइटेड स्टेट डॉलर) लगभग 1500000/- से ले कर 75000 USD (5700000/-) तक होती है।

 

प्राइवेट निजी कॉलेजों में फी का निर्धारण संस्था अपने निजी स्तर पर कर सकती है अथवा करती है, हालाँकि उत्तरप्रदेश एवं कर्नाटक जैसे कुछ राज्य सरकारों ने विद्यार्थियों पर बढ़ते आर्थिक भार को संज्ञान में लेते हुए कई नियंत्रात्मक कदम भी उठाये हैं। निजी कॉलेजों की लगभग 50% सीट्स गवर्नमेंट कोटा के अंतर्गत रिज़र्व होती है जिस पर इन्हे अपनी कुल निर्धारित फी का केवल 30% ही लेने का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार निजी कॉलेजों में उपलब्ध मैनजमेंट कोटा एवं NRI कोटा का आर्थिक दायरा काफी बृहद हो जाता है। उदाहरण के लिए इन कॉलेजों में मैनजमेंट कोटा के अंतर्गत आने वाले सीट्स के लिए न्यूनतम फी 400000/- केरल स्थित मेडिकल कॉलेज की है जबकि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च जयपुर (राजस्थान) में फी 1800000/- ली जाती है। जबकि देश के विभिन्न निजी कॉलेजों में NRI कोटा के अंतर्गत आने वाले सीट्स की औसत फी 25000 USD लगभग 19,00000/- होती है। इसके अतिरिक्त कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में स्थित निजी अथवा स्ववित्तपोषित कॉलेजों में “अन्य कोटा” के माध्यम से भी दाखिले की व्यवस्था है जहां 21,00000/- से ले कर 40,00000/- तक वार्षिक फी ली जाती है। हमारे देश में कुल 42 डीम्ड यूनिवर्सिटी हैं जो मैनजमेंट एवं NRI कोटा के अंतर्गत लगभग 6204  MBBS सीट्स उपलब्ध कराती  हैं. इन यूनिवर्सिटीज में वार्षिक फी  2,11,000/- से 22,50,000/- के मध्य होती है। MG इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस सेवाग्राम वर्धा को फी के सन्दर्भ में न्यूनतम एवं SRM मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, चेन्नई को सबसे महंगे कॉलेज के श्रेणी में माना जाता है।

हमारे देश के कुछ टॉप मेडिकल कॉलेजेस में से  ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली, आर्म्ड फ़ोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर, सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज बैंगलोर एवं जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER), किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, ग्रांट गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, सेठ GS मेडिकल कॉलेज, कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मणिपाल एवं मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज आदि प्रमुख नाम हैं।

MBBS के डिग्री प्राप्त करने के बाद मेडिसिन प्रैक्टिस करने की योग्यता एवं अधिकार स्वतः प्राप्त होते है। हालाँकि,अधिकांश विद्यार्थी इसके बाद मास्टर डिग्री प्राप्त करने को वरीयता देते है जबकि इस पेशे के व्यवसायी करण के बाद से इस क्षेत्र में जॉब की भी बहुलता देखने को मिलती है।अपनी प्राइवेट क्लिनिक स्थापित करने के अलावे इन्हे नर्शिंग होम, लैबोरेट्रीज, मेडिकल कॉलेज,बायोमेडिकल कम्पनीज,हेल्थ सेंटर, रिसर्च लेबोरेटरी, बायो टेक्निकल  कम्पनीज एवं फार्मास्युटिकल कम्पनीज में जॉब के अवसर उपलब्ध रहते हैं जहां ये जूनियर डॉक्टर, फिजिशियन, जूनियर सर्जन, साइंटिस्ट, रिसर्चर, कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट,पेडिअट्रिशन इत्यादि विभिन्न पदों पर कार्य करते हैं। हमारे देश में MBBS डिग्री होल्डर को रिक्रूट वाले कुछ प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं :- फोर्टिस हेल्थ केयर लिमिटेड, मेदांता हॉस्पिटल, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस,सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड,श्री गंगा राम हॉस्पिटल, अपोलो मुनिच हेल्थ इंडस्ट्रीज कंपनी लिमिटेड,लीलावती हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेण्टर, अपोलो हॉस्पिटल इंटरप्राइजेज लिमिटेड, पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, रेलिगेयर हेल्थ इंस्युरेन्स कंपनी लिमिटेड,सिपला लिमिटेड,इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल आदि। MBBS डॉक्टर की सैलरी कई तथ्यों पर निर्भर करती है जैसे कि  क्षेत्र में अनुभव, जॉब में भूमिका,संसथान इत्यादि। हालाँकि आरंभिक अवस्था में इन्हे 2 .4 LPA से 5 .7 LPA के मध्य ही  पैकेज दिया जाता है। परन्तु अनुभव एवं सेनियरटी के बाद इनकी सैलरी  INR 12.8 LPAसे  INR 65.4 LPA.तक हो जाती है।

स्पेशलाइजेशन में इक्षुक विद्यार्थी साधारणतः जनरल मेडिसिन,जनरल सर्जरी, पेडिएट्रिक्स,आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी,डर्मेटोलॉजी,ओफ्थल्मोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ENT,साइकाइट्री, एवं अनेस्थेसिओलॉजी जैसे विषयों का चुनाव करतें हैं। इसके आलावे  कुछ अन्य विशिष्ठ स्पेशलाइजेशन भी उपलब्ध हैं जो अतिरिक्त तीन से चार वर्षों में किये जाते हैं जैसे प्लास्टिक सर्जरी,न्यूरो सर्जरी ,कार्डिओ थोरासिस सर्जरी, पेडिअट्रिक सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी इत्यादि।