JEE(MAIN) & MATH

HOW TO PREPARE MATH

JEE main के मैथ सेक्शन के लिए एक पुरानी  कहावत है कि इसमें अच्छा स्कोर करने के लिए केमिस्ट्री का अच्छा होना जरुरी है। दरअसल केमिस्ट्री के सवालों में समय की बचत होती है जिसका उपयोग मैथ में किया जाता है। एक अच्छी तैयारी के लिए एक स्मार्ट और स्ट्रैटजिक्ल  प्लैंनिग का होना बहुत जरुरी होता है। वैसे तो इस सब्जेक्ट के लिए अरिहंत, शिंगेज, मॅग्राहील पब्लिकेशंस की कई अच्छी बुक्स हैं लेकिन शुरुआत हमेशा NCERT से ही करना सही रहता  है,इसके दो कारण  हैं पहला यह की ये आपके JEE  MAIN के लिए  एक अच्छी फाउंडेशन तैयार करता है और दूसरी तरफ आपको 12 बोर्ड की तैयारी  भी करा देता है।  किताबों के चुनाव के वक्त इस बात का अवश्य ध्यान होना चाहिए कि उसमे थ्योरी अच्छे से एक्सप्लेन की गयी हो और उसमे क्वालिटी प्रोब्लेम्स का अच्छा कलेक्शन भी हो।साधारणतः ये देखा जाता है कि कई स्टूडेंट टॉपिक से सम्बंधित एक्सरसाइज को पूरी तरह सॉल्व नहीं करतें जिसका परिणाम होता है की वें उस टॉपिक एवं उसके प्रश्नों के पुरे रेंज से अवगत नहीं हो पातें, फिर जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है लौट कर इन टॉपिक्स को कम्पलीट करना सम्भव नहीं हो पाता।

JEE(MAIN) की दृष्टि से तैयारी करने वालो के लिए पहला फोकस JEE के कुछ स्पेशल टॉपिक्स जैसे मैथमेटिकल लॉजिक, रिलेशन्स, हाइट एंड डिस्टेंस, स्टेटिस्टिक आदि पर होना चाहिए, हालाँकि इनमे से सवाल एडवांस में नहीं पूछे जाते पर MAIN में इनका लगभग 10% हिस्सेदारी जरूर रहती है. किसी टॉपिक के प्रॉब्लम सॉल्विंग के समय ये हमेशा सही रहता है की हम इन्हे A, B और C इन तीन केटेगरी में बाँट लें। A यानि बिलकुल आसान, B जो थोड़े कठिन हो पर प्रयास कर के सॉल्व किये जा सकते हैं और फिर C जो आपसे सॉल्व न होते हों। प्रश्नों को हमेशा लॉजिकल सीक्वेंस में सोचें, रिविज़न करते समय हमेशा C केटेगरी से आरम्भ करें, क्योकि  कठिन सवालों के लिए किये गए प्रयास हमे हर बार न केवल कुछ नया सिखाते है बल्कि B और A केटेगरी के सवालों के प्रति हमें अधिक शार्प और आक्रमक भी बनाते हैं।

इसके बाद कुछ टॉपिक्स जैसे वेक्टर एंड 3डी, बेसिक्स एंड डॉट क्रॉस, लाइन एवं  प्लेन इत्यादि को सहेजने पर ध्यान देना चाहिए।  ये ऐसे टॉपिक्स है जिनकी बेसिक्स यदि ठीक हो जाये और बोर्ड़ लेवल पर तैयार कर लिया जाये तो पर्याप्त रहता है|  पिछले सालों के पेपर्स के माध्यम से इस टॉपिक्स की रणनीति तय करनी चाहिए।

ऐसे कई विद्यार्थी हैं जो किसी टॉपिक विशेष पर ज्यादा समय देते है क्योकि उनकी रूचि उसमे रम जाती है। जबकि एक स्मार्ट प्रिपरेशन के लिए ये बिलकुल ही गलत है। ट्रिग्नोमेट्री के साथ भी कुछ ऐसा ही है । JEE के लिए  इसमें टी ईक्वेशन पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है और इस टॉपिक को अच्छा करने के लिए रेश्यो एंड आइडेन्टिटीज़ के फॉर्मूलों को याद करना आवश्यक है.सोल्युशन ऑफ़ ट्रैंगल को बेसिक स्तर तक ही देख लेना पर्याप्त होगा क्योकि यह MAIN के लिए कुछ खाश इम्पोर्टेन्ट नहीं है  और यही हाल इनवर्स टी फंक्शन का भी है पहले तो इसमें से सवाल ही नहीं आते और यदि आते भी है तो काफी सिंपल होते है,

अलजेब्रा के प्रायः सभी टॉपिक्स से एक एक प्रश्न रहता ही है।  क्वाड्रैटिक एक्वेशन में लोकेशन ऑफ़ रूट्स पर विशेष काम करना चाहिए। प्रीवियस ईयर के पेपर्स से गाइड लाइन लेना अच्छा रहेगा ।  बायोनोमिअल थ्योरम में भी केवल जनरल टर्म्स सम्बंधित प्रश्न आते है इसलिए इसमें बहुत अधिक मेहनत की जरुरत नहीं। सीक्वेंस एंड सीरीज से प्रायः दो प्रश्न रहते ही है हालाँकि ये एडवांस के लिए इम्पोर्टेन्ट टॉपिक माना  जाता है परन्तु JEE MAIN के लिए A P पर अच्छे से काम करना चाहिए इसमें ज्यादातर सम ऑफ़ सीरीज  या nth टर्म से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। परमुटेशन एंड कॉम्बिनेशन से एक, वह भी सिंपल प्रश्न रहता है इसके बेसिक पर काम कर  लेना पर्याप्त रहता है। प्रोबैब्लीटी के एक प्रश्न के लिए बेस थेओरम पर अच्छे से काम करना होगा। कॉप्लेक्स नंबर से प्रायः लोकस फाइंड करने सम्बंधित दो प्रश्न रहते हैं अतः इस टॉपिक को इसी दृष्टि से तैयार करना चाहिए। मैट्रिसेस एंड डेटर्मिनेन्ट्स  के प्रॉपर्टीज को अच्छे से याद कर लेना इस टॉपिक को सुरक्षित करने का सही तरीका है।

डिफरेंशियल कैलकुलस के प्रत्येक टॉपिक से एक एक प्रश्न होंगे डिफ्रेंसिएबिलिटी, कंटीन्यूटी, MOD, AOD या LIMIT पर पूरी तरह से मेहनत  करनी होगी। लगभग यही स्थिति इंटीग्रल कैलकुलस का भी है, इसमें इंडेफिनिट, डेफिनिट, डिफरेंशियल इक्वेशन पर A, B और C कैटेगरी बना कर अच्छे रियाज की अपेक्षा की जाती है। हाँ, एरिया में लाइन, सर्किल , पैराबोला के  अवश्य ही सिंपल प्रश्न रहते है, यहाँ थोड़ी राहत की उम्मीद की जा सकती है।

को-ओर्डिनटे ज्योमेट्री के तमाम  टॉपिक्स जैसे स्ट्रैट लाइन,  सर्किल, पैराबोला, एलिप्स एवं हाइपरबोला  ये सभी एक दूसरे से कनेक्टेड होते है। चूँकि JEE MAIN में   ज्यादातर प्रश्न टेंजेंट एवं कॉमन टेंजेंट से होते है, अतः इस टॉपिक को स्पेसिफिक रूप में भी तैयार किया जा सकता है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *