इंजीनियरिंग

इंजीनियरिंग पूरी तरह स्किल बेस्ड पढाई है। देश में IIT एवं NIT के अतिरिक्त अनेकों ऐसे कॉलेज हैं  जहां पर डायरेक्ट एडमिशन के माध्यम से कोर्स पूरा कर के इंडस्ट्रीज़ में स्थापित हुआ जा सकता है। आखिर में आपकी योग्यता एवं क्षमता का ही महत्व माना जायेगा  

वैसे तो मैकेनिकल इंजीनियरिंग का इतिहास हजारों  साल पुराना है लेकिन प्रोफेशनल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इसकी स्थापना 18वी शताब्दी में यूरोप के इन्डस्ट्रीअल रिवोल्युशन के समय में ही हुई।

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) में मौलिक रूप से कोर इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के विषयों को संयुक्त रूप से विकसित किया जाता है।

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग(CSE)  एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग (CpE)  में कई स्तर पर भिन्नता होती है। CSE सामान्यतः कंप्यूटर ऑपरेटर को सहयोग करने वाले अवयवों का निर्माण अथवा डिज़ाइन करते हैं। .

किसी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को इंडस्ट्रीज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने के लिए दक्ष किया जाता है जहां ये  सर्किट थ्योरी से ले कर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट तक के कार्यो का निर्वहन करते हैं।.

वर्तमान समय में स्थित अनेकों टेक्निकल क्षेत्र जैसे बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, नैनो टेक्नोलॉजी, फ्यूल सेल इत्यादि  केमिकल इंजीनियरिंग के अंतर्गत आने वाले विषय हैं।

 

बीते वक्त में मिलिट्री इंजीनियरिंग के नाम से मशहूर, अब जियो टेक्निकल इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग, वॉटर इंजीनियरिंग आदि के रूप में है ।

कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्रीज़ एवं व्यावसायिक उद्योग जगत में निरंतर हो रहे विकास के दृष्टि से आर्किटेक्चर इंजीनियर की प्रासंगिकता काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

 

यह मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल,इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर एवं  सेफ्टी इंजीनियरिंग को समाहित कर के शिप बिल्डिंग एवं ऑफ शोर स्ट्रक्चर के लिए डिज़ाइन,निर्माण एवं मेंटेनेंस आदि का प्रशिक्षण  है,

हमारे देश में  नागरिक उड्डयन महानिदेशालय भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लगभग 117 एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस कॉलेज है जो अंतराष्ट्रीय स्तर के लाइसेंस प्रदान करने वाले कोर्सेज का संचालन करते है। 

कमिंग सून

निर्णय में सावधानी क्यों ?

उच्च शिक्षा एवं बाद के व्यावहारिक जीवन में निरंतर प्रगति करने के लिए अपने रूचि के अनुरूप विषय का चुनाव महत्वपूर्ण होता है।