इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग

कोर्स, एडमिशन, जॉब, सैलरी, करियर

By अजय मिश्रा

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग क्या है  electronic & communication engineering overview

 

 

सुचना क्रांति हमारे युग की अद्भुत उपलब्धि है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस एवं सॉफ्टवेयर के संयोजन से पुरे विश्व को एक सूत्र में पिरोने की क्षमता रखने में सक्षम इंजीनियरिंग की यह शाखा न केवल व्यावहारिक धरातल पर अपितु व्यावसायिक स्तर पर भी बेहद प्रभावशाली है। हालाँकि इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, जिसे कभी रेडियो इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता था, इस का इतिहास उतना ही पुराना है  जितना की इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का, परन्तु रेडियो एवं टेलीग्राफ के इन्वेंशन के बाद इस की प्रासंगिकता और भी बढ़ गयी।

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) में मौलिक रूप से कोर इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के विषयों को संयुक्त रूप से विकसित किया जाता है। इस कोर्स का मुख्य फोकस कम्युनिकेशन होता है जो की  इलेक्ट्रॉनिक पर आधारित होता है। आरम्भ में यहां फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ एवं बेसिक इंजीनियरिंग कॉन्सेप्ट पर अध्ययन किया जाता है परन्तु आगे चल कर ये कम्युनिकेशन के कोर विषय जैसे डिज़ाइन, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, फंडामेंटल ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स, सिग्नल एंड सर्किट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, VLSI, पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर आर्किटेक्चर, एवं कण्ट्रोल सिस्टम इत्यादि पर आधारित हो जाता है। हालाँकि, ECE की गणना इंजीनियरिंग के कठिनतम ब्रांचों में होती है विशेष रूप से सिग्नल्स एंड सिस्टम, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी, माइक्रोवेव एंड राडार, पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग इत्यादि के सन्दर्भ में ऐसा  माना जाता है । परन्तु यह विद्यार्थी के क्षमता पर निर्भर करता है, यदि मैथमेटिक्स के साथ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के लॉजिक्स पर नियंत्रण हो तो इस क्षेत्र में काफी कुछ किया जा सकता है।

 

 

 

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सब्जेक्ट

ECE कोर्स (electronics and communication engineering courses) में संचार तत्वों की प्रमुखता अधिक है। इस क्षेत्र में अपने रूचि के पहचान हेतु कुछ विषयों का संक्षिप्त परिचय दिया जाता है ।

डाटा कम्युनिकेशन एंड कंप्यूटर नेटवर्क : इसमें दो या दो से  अधिक कंप्यूटर के मध्य डिजिटल डाटा के संचार का अध्ययन किया जाता है जिसमे वायरलेस या केबल नेटवर्क माध्यम का उल्लेख रहता है। 

कण्ट्रोल सिस्टम : इसमें आउट पुट सिग्नल को नियंत्रित करने की विधि का उल्लेख किया जाता है जैसे ट्रैफिक सिग्नल आवश्यकतानुसार रंग बदलते हैं।  .

डिजिटल कम्युनिकेशन : यहां  कम्युनिकेशन के पारम्परिक माध्यम एनालॉग सिगनल्स के स्थान पर ज्यादा सुरक्षित डिजिटल सिस्टम (बाइनरी नंबर ) का अध्ययन किया जाता है।

सेटेलाइट कम्युनिकेशन : इसमें पृथ्वी के किन्ही दो स्थानों पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव द्वारा सिग्नल भेजने के लिए उपयोग होने वाले सेटेलाइट माध्यम का अध्ययन किया जाता है

VLSI सिग्नल प्रोसेसिंग : यह बड़े पैमाने पर इंटीग्रेटेड सर्किट(IC) के एकीकरण का ज्ञान है जो लाखों ट्रांजिस्टर को केवल एक ही चिप में संयोजित करने पर आधारित होता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी वीडियो, इमेज एवं अन्य टेलीकम्यूनिकेशन के क्षमता व उपयोगिता का अभ्यास करते हैं।

ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन : यहां बड़े स्तर पर डाटा को ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से लाइट(प्रकाश) पल्सेस के रूप में भेजने का अध्ययन शामिल होता है। 

माइक्रो वेव इंजीनियरिंग : यह कम वेव लेंथ वाली तरंग होती है जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी रेडिएट करती है। इसके अध्ययन द्वारा विद्यार्थी अधिक सुचना एक साथ भेजने की विधि का ज्ञान प्राप्त करते हैं।

इंटर नेट थिंग्स : यह वैश्लेषिकी (analytics) एवं स्वचालन(automation) के प्रक्रिया का उन्नत स्वरूप है जो नेटवर्किंग, सेंसिंग, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एवं बड़े स्तर पर डाटा का प्रयोग कर के किसी प्रोडक्ट अथवा सेवा को एक सम्पूर्ण व्यवस्था उपलब्ध करता है। विद्यार्थी इस  विषय के माध्यम से विभिन्न इंडस्ट्रीज अथवा सिस्टम में  इसके पारदर्शिता, नियंत्रण एवं प्रदर्शन आदि गुणों का अध्ययन एवं उपयोग करते  हैं।

इसके अतिरिक्त ECE के विषयों में वायरलेस सेंसर नेटवर्क, एनालॉग इलेक्ट्रॉनिक्स, बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल इलेट्रॉनिक्स, नेटवर्क सिस्टम एवं बेसिक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग भी शामिल है। इसमें कुछ इलेक्टिव सब्जेक्ट भी पढ़ने होते हैं जैसे फिलोसोफिकल सब्जेक्ट्स, ह्यूमैनिटी से जुड़े विषय, डिजिटल मार्केटिंग आदि।

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सिलेबस (Electronics & communication Engineering syllabus) 

सेमेस्टर – 1 : इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स -1, इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स -2, इंजीनियरिंग फिजिक्स, इंजीनियरिंग केमिस्ट्री, प्रोग्रामिंग इन C एंड डाटा स्ट्रक्चर, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लेबोरेटरी, एलिमेंट ऑफ़ सिविल इंजीनियरिंग एंड इंजीनियरिंग मैकेनिक्स, कंप्यूटर ऐडेड इंजीनियरिंग ड्राइंग।

सेमेस्टर – 2 : एलिमेंट्स ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ इंडिया एंड प्रोफेशनल एथिक्स, इनविरोन्मेंटल स्टडीज़, इंजीनियरिंग फिजिक्स लैब, इंजीनियरिंग केमिस्ट्री लैब,वर्कशॉप प्रैक्टिस

सेमेस्टर – 3 : इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स -3,एनालॉग इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिक डिज़ाइन,  नेटवर्क एनालिसिस,  इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंटेशन,  फील्ड थ्योरी,  एनालॉग इलेक्ट्रॉनिक, लैब लॉजिक एवं  डिज़ाइन लैब। 

सेमेस्टर – 4 : इंजीनियरिंग मैथेमेटिक्स -4, माइक्रो कंट्रोलर, कण्ट्रोल सिस्टम, सिग्नल & सिस्टम, फंडामेंटल ऑफ़ HDL,लीनियर IC एंड एप्लीकेशन, माइक्रो कंट्रोलर लैब एवं  HDL लैब।

सेमेस्टर – 5 : मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेंयूर्शिप, डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग,  एनालॉग कम्युनिकेशन, इन्फॉर्मेशन थ्योरी एंड कोडिंग, फंडामेंटल ऑफ़ CMOS,VLSI, DSP लैब EC, एनालॉग कम्युनिकेशन एवं  Lab + LIC लैब।

सेमेस्टर – 6 : डिजिटल कम्युनिकेशन,  माइक्रोप्रोसेसर, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, एंटेना एंड प्रोपगेशन, ऑपरेटिंग सिस्टम, एडवांस कम्युनिकेशन लैब एवं  माइक्रोप्रोसेसर लैब।

सेमेस्टर – 7 :  कंप्यूटर कम्युनिकेशन नेटवर्क, ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम डिज़ाइन, VLSI लैब एंड एवं  पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स लैब।

सेमेस्टर – 8 : वायरलेस कम्युनिकेशन, डिजिटल स्विचिंग सिस्टम, प्रोजेक्ट वर्क एवं सेमिनार आदि।

 

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग एडमिशन (Electronics & communication Engineering admission)

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है जिसे 12वी की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद से किया जाता है यहां  विद्यार्थी के पास किसी भी रेकग्नाइज़्ड बोर्ड द्वारा फिजिक्स, केमिस्ट्री, एवं मैथ में न्यूनतम 60%(कुछ कॉलेजो में 50%) अंको का  होना आवश्यक होता है।

बी टेक में एडमिशन के लिए हमारे देश में हर वर्ष विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन किया जाता है जिनमे

JEE(main) व JEE Advanced  https://jeemain.nta.nic.in

BITSAT https://www.bitsadmission.com

UPSEE https://upsee.nic.in/

SRMJEEE www.srmuniversity.ac.in

COMEDK https://www.comedk.org/

इत्यादि कुछ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं हैं।

हमारे देश में इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) कोर्स के लिए कुल 31 NIT कॉलेज हैं जिनमें 20 पुराने  स्थापित इंजीनियरिंग इंस्टीटूशन हैं जबकि 11 नए स्थापित किये हुए हैं । NIT तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु ), NIT राउरकेला (उड़िशा), NIT सूरथकल (कर्नाटक), NIT वारंगल(तेलंगाना), MNNIT (उत्तर प्रदेश), NIT विश्वेस्वरया (महाराष्ट्र), NIT कालीकट (केरल), SVNIT (गुजरात), NIT सिलचर (असम), एवं NIT दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) आदि इनमे प्रमुख 10 नाम हैं। इसी प्रकार कुल 23 IITs, 20 GFTIs व 24 IIITs कॉलेज हैं जहां इस कोर्स का आयोजन किया जाता है।

 

JEE(main) एवं JEE Advanced में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को NIT,IIT,IIIT के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला मिलता है। वहीं UPSEE(उत्तर प्रदेश ) एवं COMEDK(कर्नाटक) जैसे अनेक राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगी परीक्षाएं भी हैं। कई प्राइवेट कॉलेज जैसे BITSAT, SRMJEEE आदि अपने निजी स्तर पर भी एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं। देश के अधिकांश कॉलेजों में एडमिशन JEE(main) में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है वहीं कुछ इंस्टीटूशन में डायरेक्ट एडमिशन की भी व्यवस्था होती है । हमारे देश में इस कोर्स के लिए अधिकांश कॉलेजो की औसत फी INR 4 to 10 लाख होती है। इस कोर्स के लिए सरकारी कॉलेजों में औसतन फी  INR 2 से 4 लाख ली जाती है वही  कुछ प्राइवेट कॉलेजों में इस कोर्स के लिए  में 3 से 6 लाख रूपए तक फी ली जाती है। बी टेक (इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग ) कोर्स में डायरेक्ट एडमिशन, मेरिट अथवा मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से  भी लिया जाता है जिसकी औपचारिकता www.yuvaindia.in के माध्यम से भी पूरी की जा सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग जॉब electronic & communication engineering job

साधारणतः ECE की  मांग टेलीकॉम एवं सॉफ्टवेयर इंडस्ट्रीज में विशेष रूप से रहती है परन्तु इनके लिए रोजगार की संभावनाएं एविएशन एंड एवीऑनिक्स, कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिसिटी प्लांट, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्टेशन, डाइगोनोस्टिक, मैन्युफैक्चरिंग एवं ऑफशोर कम्पनीज में भी कम नहीं होतीं । इसके अतिरिक्त सेंट्रल गवर्नमेंट, स्टेट गवर्नमेंट एवं पब्लिक  सेक्टर में भी ECE समान रूप से रिक्रूट किये जाते हैं। एक इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन इंजीनियर को रोजगार के अवसर  पर मिलने वाले पद  इस प्रकार हैं :- इलेट्रॉनिक इंजीनियर, इलेट्रॉनिक डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट इंजीनियर, डेस्कटॉप सपोर्ट इंजीनियर, फील्ड टेस्ट इंजीनियर, सिस्टम कण्ट्रोल इंजीनियर, नेटवर्क प्लानिंग इंजीनियर, सर्विस इंजीनियर, कस्टमर सर्विस इंजीनियर, आर एंड डी इंजीनियर, टेक्निकल डायरेक्टर इत्यादि | इसके अलावे ECE का स्कोप (SCOPE OF ELECTRONIC AND COMMUNICATION ENGINEERING) जो की इनके डिग्री से सीधे जुड़े होते हैं, वे हैं ब्रॉडकास्ट इंजीनियर,  एयरोस्पेस इंजीनियर,  डिज़ाइन इंजीनियर,  CAD तकनीशियन, कण्ट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर, एकॉस्टिक कंसलटेंट, एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियर आदि

सरकारी क्षेत्र में ECE स्टूडेंट UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम के माध्यम से रेलवे में अस्सिस्टेंट सिग्नल एंड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियर के पद पर ज्वाइन करते हैं। कुछ अन्य गवर्नमेंट के क्षेत्र जो ECE वालो को विशेष आकर्षित करते हैं उनमें BSNL-JTO, ISRO, DRDO, BEL एवं इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस आदि कुछ प्रमुख नाम हैं।

टेलीकॉम के कोर क्षेत्र से जुड़े कुछ जॉब जैसे:-

नेटवर्क इंजीनियर : ये स्विच, राऊटर आदि पर काम करते हैं।

टेलीकॉम/वॉइस इंजीनियर : ये विभिन्न प्रकार के वॉइस नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स जैसे PBX या इंटेरेक्टिव वौइस् रेस्पॉन्स इम्प्लीमेंटेशन आदि पर काम करते हैं।

डाटा सिक्योरिटी : एंटी मॉलवेयर, फायरवाल्स आदि पर कार्य करते हैं।

साइबर सिक्योरिटी : इनका क्षेत्र संभावित आशंका/धमकी एवं उपभोक्ता के आवश्यकताओं का रिपोर्ट बनाना आदि होता है।

सर्वर एडमिनिस्ट्रेटर : ये फिज़िकल सर्वर एवं वर्चुअल प्लेटफार्म के मेंटेनेंस से जुड़े होते हैं साथ ही नए इंस्टॉल किये गए उपकरणों के समस्या निवारण में भी भाग लेते हैं।

इसके अतिरिक्त वायर लेस सिक्योरिटी, सेटेलाइट व राडार, VLSI एवं क्लाउड टेक्नोलॉजी में इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी होती है।

 

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सैलरी  electronic & communication engineering Salary

Lorem ipsum dolor sit amet,हमारे देश में  फ्रेशर्स के लिए जहां 3.5-4.5 लाख प्रति वर्ष  सैलरी पैकेज उपलब्ध है वहीं विदेशों में 60000 से 70000 डॉलर तक इस क्षेत्र में ऑफर किये जाते हैं। हालाँकि यह पूरी तरह वर्किंग स्किल, क्वालिफिकेशन,एवं कार्य स्थल जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है। साधारणतः ECE फ्रेशर्स को इलेक्ट्रॉनिक अथवा कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग का जॉब ही मिले यह आवश्यक नहीं होता अधिकांश अवसर पर IT सेक्टर्स से इनकी शुरुआत होती है। कोर क्षेत्र के कुछ कम्पनीज़ 5 से 7 लाख का पैकेज ऑफर करती हैं,इसके अतरिक्त  किसी विशेष कंपनी में वह भी रेप्यूटेड कॉलेज के माध्यम से जाने पर फ्रेशर्स भी 12 से 15 लाख का पैकेज प्राप्त करते हैं। साधारणतः औसत कॉलेज से पास आउट फ्रेशर्स जो TCS, L&T, Wipro आदि कंपनी ज्वाइन करते हैं उन्हें  3.5-4.5 लाख प्रति वर्ष  सैलरी पैकेज उपलब्ध होती है।   पर्याप्त अनुभव  के बाद इस क्षेत्र में काफी अट्रैक्टिव सैलरी प्राप्त की जाती है।

यहाँ कुछ कम्पनीज़ जो इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर को रिक्रूट करती हैं उनके सलैरी की सूची दी जाती है

HRSK मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ₹ 45,000 प्रति माह

इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया ₹ 37,351 प्रति माह 

ऑरबिट कारपोरेशन ₹ 36,800 प्रति माह 

टाटा मोटर्स ₹ 29,554 प्रति माह

अड्यूरेक प्राइवेट लिमिटेड  ₹ 30,070 प्रति माह

दृष्टि कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड ₹ 30,159प्रति माह 

रीच आउट कंसल्टेंसी ₹ 22,915 प्रति माह 

विक्टर टेक्नोलॉजी  ₹ 25,001 प्रति माह

ACST  ₹ 23,504 प्रति माह

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ₹ 23,962 प्रति माह 

फिलिप्स ₹ 18,611 प्रति माह

SAS कंपनी  ₹ 19,933 प्रति माह

NEPC  ₹ 18,819 प्रति माह

BAJAJ  ₹ 19,422 प्रति माह

JBM ऑटो ₹ 18,262 प्रति माह

ग्लोबल प्लेसमेंट  ₹ 16,085 प्रति माह

NEPC ₹ 18,819 प्रति माह  

 

इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग करियर (electronic & communication engineering career)

करियर के लिहाज से ECE को सुरक्षित माना जायेगा। ब्यूरो लेबर ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स (BLS) के अनुसार इस क्षेत्र के विस्तार का दर लगभग 7% (2016 से 2026) अनुमान किया गया है। जबकि ASSOCHAM एवं  NEC कारपोरेशन के एक संयुक्त सर्वे में लगभग 400 बिलियन डॉलर का निवेश (2020) अकेले इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में अनुमानित है। निश्चित रूप से ऐसे परिदृश्य में ECE वालों का करियर संभावनाओं एवं अवसरों से भरा हुआ होगा।  पेशेवर दक्षता के लिहाज से ECE ग्रेजुएट्स अपने रूचि के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों का चुनाव कर सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज़ के उभरते बाजार में  जिस प्रकार नए फर्म, उपभोक्ता के आवश्यकताओं की पूर्ति  हेतु  तेजी से स्थापित हो रहें है, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर की मांग भी उसी रफ़्तार से बढ़ रही है। साथ ही  कम्युनिकेशन नेटवर्क वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है जहां इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर एक स्थापित करियर विकल्प सिद्ध होता है। एक अन्य करियर विकल्प है इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट इंजीनियर का, जो ECE ग्रेजुएट्स में काफी लोकप्रिय भी है। हालाँकि सिस्टम कण्ट्रोल इंजीनियर जैसे प्रोफ़ाइल विभिन्न इंडस्ट्रीज़ में बुनियादी स्तम्भ माने जाते हैं।

इस क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन की महत्ता भी कम नहीं, विशेष रूप से सिग्नल प्रोसेसिंग, टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग,कण्ट्रोल इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, एवं VLSI डिज़ाइन इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता हासिल कर के करियर को नए आयाम दिए जा सकते हैं

बी टेक इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के बाद हायर स्टडीज़ के लोकप्रिय ऑप्शन में से नैनो टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, एम्बेडेड सिस्टम, VLSI डिज़ाइन एवं साइबर सिक्योरिटी आदि प्रमुख हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर कोर्स करने हेतु GATE क्लियर करने के अतिरिक्त बी टेक में  न्यूनतम 60 % अंक का होना आवश्यक होता है।