कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग

कोर्स, एडमिशन, जॉब, सैलरी, करियर

By अजय मिश्रा

 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग कोर्स क्या है computer science engineering overview

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) आज के दौर में सर्वाधिक पसंद किये जाने वाला ब्रांचों में से है। इस ऐकडेमिक प्रोग्राम में कंप्यूटर इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस, इन दोनों क्षेत्रों को समायोजित कर के अध्ययन किया जाता है। यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि  कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग(CSE)  एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग(CpE)  में कई स्तर पर भिन्नता होती है। CSE सामान्यतः कंप्यूटर ऑपरेटर को सहयोग करने वाले विभिन्न अवयवों का निर्माण अथवा डिज़ाइन करते हैं। जिसमे कंप्यूटर सिस्टम को चलाने  वाले सॉफ्टवेयर प्रोग्राम, कंप्यूटर चिप एवं विभिन्न इंडस्ट्रीज़ के लिए सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन शामिल हो सकते हैं। कंप्यूटर साइंस इंजीनियर के समय का एक बड़ा हिस्सा कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीतता है। जहां उनके कार्यो में विशेष रूप से शामिल होता हैं।

>विभिन्न इंडस्ट्रीज़ के लिए सॉफ्टवेयर का डिज़ाइन व निर्माण करना।

>किसी इंडस्ट्री के सॉफ्टवेयर,हार्डवेयर एवं नेटवर्क को मैनेज करना।

>PC या लैपटॉप सम्बंधित पुर्जो के डिज़ाइन एवं डेवलपमेंट में शामिल होना।

>विभिन्न पेरीफेरल जैसे प्रिंटर, मॉडेम  या स्कैनर आदि के लिए सॉफ्टवेयर बनाना।

>विंडो, लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए अल्गोरिथम एवं कोड लिखना।

कंप्यूटर इंजीनियरिंग (CpE)  में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग सहित कंप्यूटर साइंस के विभिन्न क्षेत्रों को समाहित कर के कंप्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर का निर्माण किया जाता है।  यहां हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर का एकीकरण, सॉफ्टवेयर डिज़ाइन आदि के  प्रशिक्षण में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की भी विशेष भूमिका होती है। कंप्यूटिंग में हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर के विभिन्न पहलुओं के जैसे माइक्रो कंट्रोलर, माइक्रो प्रोसेसर, VLSI चिप की डिज़ाइन, एनालॉग सेंसर अथवा सिग्नल सर्किट बोर्ड की डिज़ाइन, रोबोटिक सिस्टम आदि जो मोटर व सेंसर जैसे इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर निर्भर करते है, पर इन्हें काम करना होता है। इस क्षेत्र के विस्तृत आयाम में अपने रूचि के अनुरूप एवं करियर चॉइस के अनुसार इनके जॉब  में प्रायः सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, स्मार्ट फोन एप्लीकेशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, हार्डवेयर डिज़ाइन, प्रोडक्ट की बनावट, नेटवर्क डिज़ाइन/मेंटेनेंस  आदि शामिल होते हैं ।

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में भी B.E (बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग इन कंप्यूटर साइंस) एवं B.Tech (बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी इन कप्म्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) जैसे दो उपाधियों का प्रयोग किया जाता है।

B.E 4 वर्षीय कोर्स में कंप्यूटर साइंस एवं आर्किटेक्चर से सम्बंधित सभी थ्योरेटिकल व टेक्निकल विषयों को शामिल किया जाता है, जिसमे प्रोग्रामिंग के अतिरिक्त कई एडवांस टॉपिक्स जैसे डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस आदि अनेक विषय शामिल होते हैं । मौलिक रूप से यह विस्तृत एवं सैद्धांतिक ज्ञान पर विशेष केंद्रित कोर्स माना जाता है।

B.Tech भी 4 वर्षीय कोर्स है जो की समान रूप से ही सारे टॉपिक्स को कवर करता है, परन्तु यह प्रैक्टिकल एवं टेक्निकल पहलुओं पर विशेष केंद्रित कोर्स है जो व्यावहारिक जगत के कंप्यूटिंग में काम आते हैं।

 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग  सब्जेक्ट (Computer Science Engineering subjects)

सामान्य विषय जो प्रायः फर्स्ट ईयर के सभी ब्रांच में समान होते है, उनके के अतिरिक्त CSE में प्रमुखता वाले विषय हैं  

1. डिज़ाइन एंड एनालिसिस ऑफ़ एल्गोरिथ्म 2. डाटा स्ट्रक्चर  3. डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स 4. ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग जैसे  C++/Java/Python आदि 5. डिस्क्रीट मैथमेटिकल स्ट्रक्चर 6. ऑपरेटिंग सिस्टम 7. डाटा बेस मैनेजमेंट सिस्टम 8. कंप्यूटर सिस्टम आर्किटेक्चर 9. प्रोबेबिलिटी स्टेटिस्टिक एंड न्यूमेरिकल टेक्निक 10. माइक्रो प्रोसेसर एंड माइक्रो कंट्रोलर 11. कंप्यूटर नेटवर्क 12.थ्योरी ऑफ़ कम्प्यूटेशन 13. आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस 14. कम्पाइलर डिज़ाइन  15. सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग 16. सिस्टम सॉफ्टवेयर 17. कंप्यूटर ग्राफिक्स आदि। इसके अतिरिक्त कई इलेक्टिव भी है जो कैंडिडेट द्वारा चुनें जाते हैं जैसे डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग, नेचुरल लैंग्वेज, प्रोसेसिंग, एम्बेडेड सिस्टम, पैटर्न रिकग्निशन, पैरेलल एंड डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम आदि।

 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग सिलेबस (computer science engineering syllabus)

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग का कोर्स 8 सेमेस्टर में विभाजित है। यहां एक वर्ष में दो सेमेस्टर क्लियर करने का प्रावधान है। सेमेस्टर के अनुसार इस कोर्स का विवरण इस प्रकार है 

सेमेस्टर 1 :  इंग्लिश,  इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स 1,  इंजीनियरिंग फिजिक्स, इंजीनियरिंग केमिस्ट्री, कंप्यूटर सिस्टम एंड प्रोग्रामिंग,  इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग ।

सेमेस्टर 2 : कम्युनिकेशन टेक्निक्स,  इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स 2, इंजीनियरिंग केमिस्ट्री /फिजिक्स,  इंजीनियरिंग मेकेनिक्स, मकेनिकल इंजीनियरिंग,इनविरोन्मेंटल स्टडी एंड डिसास्टर मैनेजमेंट ।

सेमेस्टर 3 :  इंजीनियरिंग मैथेमेटिक्स 3,  डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स,  इलेक्ट्रॉनिक्स सर्किट,  डिस्क्रीट स्ट्रक्चर, ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग, डाटा स्ट्रक्चर ।

सेमेस्टर 4 : कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग,  प्रिंसिपल ऑफ़ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, कप्यूटर ऑर्गनाइज़ेशन एंड आर्किटेक्चर, डेटाबेस एंड फाइल सिस्टम,  इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड इकोनॉमिक्स, सिस्टम सॉफ्टवेयर ।

सेमेस्टर 5 : सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, माइक्रोप्रोसेसर एंड इंटरफ़ेस, इ कॉमर्स, कंप्यूटर ग्राफिक्स टेलीकम्युनिकेशन  फंडामेंटल, लॉजिकल एंड फंडामेंटल प्रोग्रामिंग, इनफार्मेशन थ्योरी एंड कोडिंग ।

सेमेस्टर 6 : ऑपरेटिंग सिस्टम, कंप्यूटर नेटवर्क, डिज़ाइन एंड एनालिसिस, एम्बेडेड सिस्टम, थ्योरी ऑफ़ कम्प्यूटेशन, डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग, एडवांस सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, माइक्रोवेव एंड सेटेलाइट कम्युनिकेशन ।

सेमेस्टर 7: कम्पाइलर कंस्ट्रक्शन, डाटा माइनिंग एंड वेयर हाउसिंग, लॉजिक सिंथेसिस,  आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मल्टी मिडिया सिस्टम, सर्विस ओरिएंटेड आर्किटेक्चर,  ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, रियल टाइम सिस्टम ।

सेमेस्टर 8 :  इनफार्मेशन सिस्टम एंड सेक्युरिटीज़,  CAD फॉर VLSI डिज़ाइन, एडवांस कंप्यूटर आर्किटेक्चर,  डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम, इमेज प्रोसेसिंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग  आदि।

 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एडमिशन (computer science engineering admission)

बी टेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है जिसे 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद से किया जाता है यहां  विद्यार्थी के पास किसी भी रेकग्नाइज़्ड बोर्ड द्वारा फिजिक्स, केमिस्ट्री, एवं मैथ में न्यूनतम 60%(कुछ कॉलेजो में 50%) अंको का  होना आवश्यक होता है।

बी टेक में एडमिशन के लिए हमारे देश में हर वर्ष विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन किया जाता है जिनमे

JEE(main) व JEE Advanced  https://jeemain.nta.nic.in

BITSAT https://www.bitsadmission.com

UPSEE https://upsee.nic.in/

SRMJEEE www.srmuniversity.ac.in

COMEDK https://www.comedk.org/

इत्यादि कुछ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं हैं।

हमारे देश में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग कोर्स के लिए कुल 31 NIT कॉलेज है जिनमे 20 पुराने  स्थापित इंजीनियरिंग इंस्टीटूशन है जबकि 11 नए स्थापित किये हुए हैं। NIT तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु ), NIT राउरकेला (उड़िशा), NIT सूरथकल (कर्नाटक), NIT वारंगल (तेलंगाना), MNNIT (उत्तर प्रदेश), NIT विश्वेस्वरया (महाराष्ट्र),NIT कालीकट (केरल),SVNIT (गुजरात), NIT सिलचर (असम), एवं NIT दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) आदि इनमें प्रमुख 10 नाम हैं। इसी प्रकार कुल 23 IITs, 20 GFTIs व 24 IIITs कॉलेज हैं जहां इस कोर्स का आयोजन किया जाता है।

JEE(main) एवं JEE Advanced में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को NIT,IIT,IIIT के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला मिलता है। वहीं UPSEE(उत्तर प्रदेश ) एवं COMEDK (कर्नाटक) जैसे अनेक राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगी परीक्षाएं भी हैं। कई प्राइवेट कॉलेज जैसे BITSAT, SRMJEEE आदि अपने निजी स्तर पर भी एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं। देश के अधिकांश कॉलेजों में एडमिशन JEE(main) में प्राप्त अंकों के आधार पर भी होता है वहीं कुछ इंस्टीटूशन में डायरेक्ट एडमिशन की भी व्यवस्था होती है । हमारे देश में इस कोर्स के लिए अधिकांश कॉलेजो की औसत फी INR 4 to 10 लाख होती है। इस कोर्स के लिए सरकारी कॉलेजों में औसतन फी  INR 2 से 4 लाख ली जाती है वही  कुछ प्राइवेट कॉलेजों में इस कोर्स के लिए  में 3 से 6 लाख रूपए तक फी ली जाती है। बी टेक (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग) कोर्स में डायरेक्ट एडमिशन, मेरिट अथवा मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से  भी लिया जाता है जिसकी औपचारिकता www.yuvaindia.in के माध्यम से भी पूरी की जा सकती है।

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग  जॉब(computer science engineering job)

CSE सेक्टर में रोजगार की बढ़ती संभावनाओं के साथ computer science engineering scope में भी काफी इजाफा हुआ है। विभिन्न इंडस्ट्रीज जैसे आई टी /सॉफ्टवेयर कंपनी, एकेडेमिक इंस्टीटूशन, सेल एंड मार्केटिंग फर्म, जर्नलिज्म, एडिटिंग एंड कंटेंट या अन्य इंजीनियरिंग फर्म्स में इनके लिए जॉब के तमाम संभावनाएं उपलब्ध हैं। यहां कुछ पदों के नाम एवं उनके कार्यों के स्वरूप का परिचय दिए जा रहे हैं

सिस्टम डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर : ये डाटा सम्बंधित सुरक्षा उसकी अखंडता एवं प्रदर्शन इत्यादि के अलावे समस्या निवारण आदि मुद्दों पर कार्य करते हैं।

सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर : ये हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर सिस्टम को अपग्रेड करने व उसे इनस्टॉल एवं मॉनिटर करने का कार्य करते हैं जिसके के लिए इन्हें विभिन्न आवश्यक अवयव जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम, सिक्योरिटी टूल्स, बिज़नेस एप्लीकेशन एवं वेब सर्वर को मैंटेन रखना होता है।

कंप्यूटर प्रोग्रामर : ये ऑपरेटिंग सिस्टम एवं सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के निर्माण सम्बन्धी कोडिंग का कार्य करते है जिसके माध्यम से विभिन्न एप्लीकेशन, कंप्यूटर पर रन करते हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर : इनका कार्य सॉफ्टवेयर का निर्माण, डिज़ाइन, टेस्टिंग एवं मूल्यांकन आदि होता है।

सॉफ्टवेयर डेवलपर : सॉफ्टवेयर डेवलपर की भूमिका ऐसे एप्लीकेशन को निर्मित करने में होती है जिसके माध्यम से यूजर किसी कार्य विशेष को कंप्यूटर या मोबाइल आदि पर करते हैं।

सिस्टम डिज़ाइनर : ये किसी सिस्टम के डाटा एवं इंटरफेस के आर्किटेक्ट को परिभाषित करते हैं।

एप्लीकेशन कंसलटेंट : विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर एवं अप्लीकेशन के लिए प्लानिंग, डिज़ाइनिंग, टेस्टिंग आदि के अतिरिक्त क्लाइंट से कम्यूनिकेट करना, डाटा एनालाइज करना एवं सपोर्ट बेस डेवेलप रखना आदि इनकी जिम्मेवारी होती है।

इंजीनियर सपोर्ट स्पेशलिस्ट : ये उपभोक्ता को  टेक्निकल सहायता देने एवं  विभिन्न व्यापारिक मुद्दों में, जिसमें सॉफ्टवेयर अथवा हार्डवेयर सम्बन्धी टेक्निकल विषय शामिल होते हैं, का निवारण करते हैं।

कंप्यूटर साइंस इंजीनियर को जॉब ऑफर करने वाले कम्पनीज में:- GOOGLE, FAEBOOK, YAHOO, IBM GLOBAL SERVICES, FLIPCART, ORACLE, PAYTM, APPLE, INFOSYS,WIPRO, HCL,TATA CONSULTANCY इत्यादि कुछ बड़े नाम हैं।

 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग  सैलेरी (computer science engineering salary)

CSE ग्रेजुएट के लिए औसत सैलरी “पेस्केल.कॉम” के अनुसार ₹788,466 आंकी गयी है। हालाँकि यह बहुत हद तक कार्य के क्षेत्र, अनुभव एवं कंपनी पर निर्भर करता है। साधारणतः इस क्षेत्र में दो प्रकार की कम्पनीज़ का वर्चस्व है। पहला सर्विस आधारित एवं दूसरा प्रोडक्ट आधारित। सर्विस बेस्ड कम्पनीज़ में CSE फ्रेशर के लिए 3 से 4 लाख का पैकेज ऑफर किया जाता है,जबकि  प्रोडक्ट बेस्ड कंपनी में यह लगभग 5 से 10 लाख प्रति वर्ष होता है। 3 से 5 वर्षो के कार्य अनुभव के बाद सर्विस बेस्ड कंपनी में भी 10 से 12 लाख के पैकेज की अपेक्षा की जाती है।

हमारे देश  में बड़ी संख्या में रिक्रूट करने वाली कम्पनीज़ जैसे TCS, WIPRO,INFOSYS, COGNIZANT आदि जो लगभग 70 % स्टूडेंट्स को रोजगार देती हैं वे 3 से 4 लाख तक का  ही  पैकेज ऑफर करती हैं। कुछ कम्पनीज़ जैसे BNP Paribas, Oracle, Mu Sigma आदि जहां लगभग 15% कैंडिडेट प्लेस्मेंट ले पाते  हैं वे औसत से थोड़ा अधिक लगभग 5 से 7 लाख का पैकेज ऑफर करती हैं। 8 से 10 लाख का पैकेज  देने वाले कम्पनीज़ में Morgan Stanley, Citicorp, Samsung आदि के नाम आते है जो लगभग 10 % कैंडिडेट को काम देती हैं। शेष 5 % कैंडिडेट  Google,Microsoft,Qualcomm जैसे कम्पनीज़ में जाते हैं जहां 13 लाख से अधिक का पैकेज ऑफर किया जाता है।  

 

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग  करियर (computer science engineering career)

यद्यपि CSE स्वयं में एक इंजीनियरिंग का स्पेशलाइज्ड क्षेत्र है, फिर भी इसमें अतिरिक्त विशिष्ठ्ता हासिल करने के लिए टेलीकम्यूनिकेशन, वेब डिज़ाइनिंग अथवा हार्डवेयर एंड सॉफ्टवेयर इम्प्लीमेंटेशन एंड मैनेजमेंट जैसे अनेकों स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम उपलब्ध हैं। एक CS इंजीनियर से यह अपेक्षा की जाती  है कि वह विभिन्न इंडस्ट्रीज के अनुकूल सॉफ्टवेयर को डिज़ाइन करे अथवा इंडस्ट्री के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर एवं नेटवर्क को मैनेज करे या फिर विंडो या लिनक्स जैसे किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए आवश्यक कोड अथवा अल्गोरिथम की रचना करे। वर्तमान समय मशीन लर्निंग, वेब डेवलपमेंट स्किल की प्रधानता है, nodejs जो नेटवर्किंग और सर्वर-साइड एप्लिकेशन बनाने के लिए उपयोग किया जाता है आदि में महारत हासिल कर के इस क्षेत्र में बेहतर करियर बनाया जा सकता है।

इंजीनियरिंग के अन्य ब्रांचो की तरह CSE में भी स्किल की प्रधानता है। इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए यह आवश्यक है कि स्टूडेंट के पास एनालिटिकल, प्रॉब्लम सॉल्विंग, क्रिएटिविटी एवं क्रिटिकल थिंकिंग के साथ एक अच्छी प्रोग्रामिंग स्किल हो।