सिविल इंजीनियरिंग

कोर्स, एडमिशन, जॉब, सैलरी, करियर

By अजय मिश्रा

 सिविल इंजीनियरिंग कोर्स क्या है (What is civil engineering)

बीते वक्त में मिलिट्री इंजीनियरिंग के नाम से मशहूर इंजीनियरिंग की यह शाखा इस क्षेत्र की पुरातन शाखाओं में से एक है। सन 1828 ईस्वी में इसे प्रोफेशनल इंजीनियरिंग  प्रोग्राम का दर्जा  दिया गया था । सिविल इंजीनियरिंग में मौलिक रूप से आधारिक संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण से जुड़ी प्लानिंग, डिज़ाइन एवं कंस्ट्रक्शन से सम्बंधित विषयों का अध्ययन कराया जाता है। निर्माण के क्षेत्र में हाईवे, ब्रिज, टनल, स्कूल, हॉस्पिटल, एयरपोर्ट के अतिरिक्त सीवेज सिस्टम एवं वाटर ट्रीटमेंट जैसे आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का महत्व हमेशा से ही रहा है। सिविल इंजीनियरिंग में अध्ययन कराये जाने वाले विषयों (civil engineering subjects) में मुख्यतः स्ट्रक्चरल एनालिसिस,आर सी सी डिज़ाइन, जिओटेक्निकल इंजीनियरिंग, फ्लूइड मैकेनिक्स, सर्वेइंग, ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग, मैकेनिक्स ऑफ़ सॉलिड, कंस्ट्रक्शन प्लानिंग एंड एनवीरोंमेंट इंजीनियरिंग आदि का नाम लिया जाता है। सिविल इंजीनियरिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत है इसमें विभिन्न प्रकार के शाखाएं (type of civil engineering) जुडी हुई हैं। जैसे इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन एंड मैनेजमेंट, जियो टेक्निकल इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग, वॉटर इंजीनियरिंग, सस्टेनेबल इंजीनियरिंग आदि।


सिविल इंजीनियरिंग के प्रकार (Type of civil engineering)

1. इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन एंड मैनेजमेंट :- प्रोजेक्ट मैनेजमेंट व एसेट मैनेजमेंट स्किल किसी शहर अथवा टाउन के इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण एवं मेंटेनेंस के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विभिन्न  इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे बिल्डिंग, रोड, रेलवे, घाट/जेटी, ब्रिज के अलावे प्राकृतिक संसाधनों वाले सुविधाएं, डैम एवं वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट आदि के निर्माण के सन्दर्भ में साध्यता (फिजिबिलिटी), डिज़ाइन, कंस्ट्रक्शन एवं हस्तांतरण जैसे  अनेकों पायदान पूरे  करने होते हैं। कंस्ट्रक्शन इंजीनियर प्रोजेक्ट से सम्बंधित उपकरण, मटेरियल एवं लोगों को संयोजित करते हुए सुरक्षित रूप से कंस्ट्रक्शन के कार्य को पूरा करता है।

2 . जियो टेक्निकल इंजीनियरिंग :- किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर का सीधा सम्बन्ध धरातल या जमीन से होता है। जिओ टेक्निकल इंजीनियरिंग मिट्टी, चट्टान, पठार व दलदल जैसे अनेकों चुनौतियों का इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन करता है। इंफ्रास्ट्रक्चर जिसमें टनल, ब्रिज, डैम, रोड, रेलवे, पोर्ट, बिल्डिंग आदि शामिल होते हैं, उन्हें जिस प्रकार की भूमि पर निर्मित होना होता है, उस भूमि के व्यवहार पर निर्माण की आधारशिला रखी जाती है। और यह जियो टेक्निकल इंजीनियरिंग के विषय के अंतर्गत आता है। 

3. स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग :- यह विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर के डिज़ाइन का अन्वेषण है। इसमें विभिन्न स्ट्रक्चर्स के निर्माण में उसकी बनावट, सुरक्षा, कितनी टिकाऊ और फ़ायदेमंद है, या फिर कितनी किफायती, मजबूत  एवं मनभावन है आदि विषयों  पर काम किया जाता है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर, पारम्परिक रूप से उपयोग में आने वाले मेटेरियल जैसे स्टील, पत्थर, कंक्रीट आदि  के साथ ग्लास एल्युमीनियम, पॉलीमर एवं कार्बन फाइबर का प्रयोग मैथ व फिजिक्स के सिद्धांतो के आधार पर करते हैं।

4. ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग :- विकसित होते हमारे विश्व में एक बड़े स्तर पर ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रभाव को स्पष्ट देखा जा सकता है। जिसमे रेल, रोड के अतिरिक्त वायु एवं जल मार्ग का प्रयोग भी काफी विस्तृत एवं अनिवार्य माना जाता है। ट्रांसपोर्ट इंजीनियर ऐसे ही किसी पब्लिक या निजी इंफ्रास्ट्रचर को प्लान एवं डिज़ाइन करता है जो यात्रा एवं परिवहन से सम्बंधित विभिन्न पक्षों को जैसे सुरक्षा, न्यूनतम खर्च, टिकाऊ व मजबूत निर्माण एवं कम भीड़ आदि विषयों को शामिल करता है।

5. वॉटर इंजीनियरिंग:- पानी का स्वरूप जितना मातृत्व भरा है यह उतना ही विकराल भी हो जाता है। भूमिगत जल एवं बाढ़ के अलावे नदियों एवं समुद्री तटों पर पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रभाव वॉटर इंजीनियरिंग की चुनौतियां हैं।

6. सस्टेनेबल इंजीनियरिंग :- सस्टेनेबिलिटी का अर्थ पृथ्वी के सिमित पर्यावरण की परिधी  में रहने से है। सस्टेनेबल इंजीनियरिंग एक प्रकार से एनवीरोंमेन्टल इंजीनियरिंग का ही स्वरूप है जहां पर्यावरण, सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था को तकनिकी से जोड़ कर निर्माण का कार्य किया जाता है। बढ़ते जनसंख्या एवं जीवन के संरक्षण के लिए अनिवार्य पर्यावरण के बीच समुचित ताल मेल बना कर इंडस्ट्रीज के मांग को पूरा करना इनके दायित्व में शामिल है। 

 

सिविल इंजीनियरिंग एडमिशन (Civil engineering admission)

एडमिशन हेतु शैक्षणिक मानदंड(academic criterion) को तीन कोर्स / प्रोग्राम के लिए  विभाजित किया गया है :-

1 . डिप्लोमा : यह तीन वर्षीय प्रोग्राम है जो 10वी की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद से किया जाता है।

2 . बी टेक : यह 4 वर्षीय अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है जिसे 12वी की परीक्षा उत्तीर्ण करने बाद से किया जाता है यहां  विद्यार्थी के पास किसी भी रेकग्नाइज़्ड बोर्ड द्वारा फिजिक्स, केमिस्ट्री, एवं मैथ में न्यूनतम 60%(कुछ कॉलेजो में 50%) अंको का  होना आवश्यक होता है।  कुछ इंस्टीटूशन डिप्लोमा होल्डर को लैटरल एंट्री द्वारा  डायरेक्ट बी टेक सेकंड ईयर में भी एडमिशन लेते है।    

3 . एम टेक : यह 2 वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है जिसे बी टेक के बाद किया जाता है।  इसके अतिरिक्त रिसर्च के क्षेत्र में PhD (डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी) डिग्री भी प्राप्त की जाती है।

बी टेक में एडमिशन के लिए हमारे देश में हर वर्ष विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन किया जाता है जिनमे

JEE(main) व JEE Advanced  https://jeemain.nta.nic.in

BITSAT https://www.bitsadmission.com

UPSEE https://upsee.nic.in/

SRMJEEE www.srmuniversity.ac.in

COMEDK https://www.comedk.org/

इत्यादि कुछ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं हैं।

हमारे देश में सिविल इंजीनियरिंग कोर्स के लिए कुल 31 NIT कॉलेज है जिनमे 20 पुराने  स्थापित इंजीनियरिंग इंस्टीटूशन है जबकि 11 नए स्थापित किये हुए है | NIT तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु ), NIT राउरकेला (उड़िशा), NIT सूरथकल (कर्नाटक),NIT वारंगल(तेलंगाना), MNNIT (उत्तर प्रदेश),NIT विश्वेस्वरया (महाराष्ट्र),NIT कालीकट (केरल), SVNIT (गुजरात), NIT सिलचर (असम), एवं NIT दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) आदि इनमे प्रमुख 10 नाम हैं। इसी प्रकार कुल 23 IITs, 20 GFTIs व 24 IIITs कॉलेज हैं जहां इस कोर्स का आयोजन किया जाता है।

JEE(main) एवं JEE Advanced में स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को NIT,IIT,IIIT के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला मिलता है।वहीं UPSEE(उत्तर प्रदेश ) एवं COMEDK(कर्नाटक) जैसे अनेक राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले प्रतियोगी परीक्षाएं भी हैं। कई प्राइवेट कॉलेज जैसे BITSAT, SRMJEEE आदि अपने निजी स्तर पर भी एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं। देश के अधिकांश कॉलेजों में एडमिशन JEE(main) में प्राप्त अंकों के आधार पर भी होता है वहीं कुछ इंस्टीटूशन में डायरेक्ट एडमिशन की भी व्यवस्था होती है । हमारे देश में इस कोर्स के लिए अधिकांश कॉलेजो की औसत फी INR 4 to 10 लाख होती है। इस कोर्स के लिए सरकारी कॉलेजों में औसतन फी  INR 2 से 4 लाख ली जाती है वही  कुछ प्राइवेट कॉलेजों में इस कोर्स के लिए  में 3 से 6 लाख रूपए तक फी ली जाती है। बी टेक (सिविल इंजीनियरिंग) कोर्स में डायरेक्ट एडमिशन, मेरिट अथवा मैनेजमेंट कोटा के माध्यम से  भी लिया जाता है जिसकी औपचारिकता www.yuvaindia.in के माध्यम से भी पूरी की जा सकती है।

सिविल इंजीनियरिंग सिलेबस (Civil Engineering syllabus / subjects )

बी टेक सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स 8 सेमेस्टर में विभाजित है। यहां एक वर्ष में दो सेमेस्टर क्लियर करने का प्रावधान है। सेमेस्टर के अनुसार इस कोर्स का विवरण इस प्रकार है :-

सेमेस्टर 1 : मैथमेटिक्स, इंजीनियरिंग मैकेनिक्स, इंजीनियरिंग ग्राफ़िक्स, हयूमैनिटिज़ एवं  इंजीनियरिंग फिजिक्स।

सेमेस्टर 2 : इंजीनियरिंग केमिस्ट्री, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, सर्वेइंग, बेसिक इंजीनियरिंग वर्कशॉप,एवं स्ट्रेंथ ऑफ़ मैटेरियल्स ।

सेमेस्टर 3 : बिल्डिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग इलेट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन, स्ट्रक्चरल एनालिसिस, फ्लूइड मैकेनिक्स एवं  इंजीनियरिंग जियोलॉजी।

सेमेस्टर 4 : सिविल इंजीनियरिंग ड्राइंग, ओपन चैनल हाइड्रॉलिक मशीनरी, जिओ टेक्निकल इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग, फ्लूइड लेबोरेटरी।

सेमेस्टर 5 :  एनवीरोंमेन्टल इंजीनियरिंग, इरीगेशन इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग इकोनॉमिक्स एंड प्रिंसिपल ऑफ़ मैनेजमेंट, डिज़ाइन ऑफ़ हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर एवं डिज़ाइन एंड ड्राइंग ऑफ़ RC स्ट्रक्चर ।

सेमेस्टर 6 :  न्यूमेरिकल मेथड एंड ऑपरेशन रिसर्च, एडवांस स्ट्रक्चरल डिज़ाइन, एडवांस फाउंडेशन डिज़ाइन, ग्राउंड वॉटर हाइड्रोलॉजी एवं  बिल्डिंग मेटेरियल।

सेमेस्टर 7 :  एडवांस सर्वेइंग एंड रिमोट सेंसिंग, क्वान्टिटी सर्वेइंग एंड वैल्यूएशन, आर्किटेक्चर एंड टाउन प्लानिंग,  ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग एवं   कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट।

सेमेस्टर 8 : अर्थ एंड रॉक फील डैम इंजीनियरिंग,कोस्टल इंजीनियरिंग एंड मरीन इंजीनियरिंग, एनवायर्नमेंटल पॉल्यूशन कण्ट्रोल इंजीनियरिंग, फाइनाइट एलिमेंट मेथड एवं एडवांस मैथमेटिक्स।

सिविल इंजीनियरिंग जॉब (Civil engineering job)

पारम्परिक रूप से सिविल इंजीनियर के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइसेस में जॉब की उपलब्धता अधिक होती है। विभिन्न लोकोपयोगी प्रोजेक्ट्स जैसे रोड, ब्रिज, टनल, रेल लाइन या अन्य समान रूप से बड़े निर्माण का कार्य साधारणतः गवर्नमेंट द्वारा ही कराया जाता है। हालाँकि इन दिनों सरकार के बदली हुई नीतियों के कारण विभिन्न प्राइवेट ऑर्गनाइज़ेशन जो गवर्नमेंट के कार्य कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर ले कर पूरा करती है, उन्हें भी सिविल इंजीनियर के रिक्रूटमेंट की आवश्यकता होने लगी है। यदि सिविल इंजीनियरिंग के वर्तमान  ट्रेंड का व्योरा लिया जाये तो हमारे  देश में प्रति वर्ष 50000 नए जॉब निर्मित होने का अनुमान है। इसका एक बड़ा कारण केंद्र सरकार  द्वारा लगभग 50000 करोड़ रुपये का पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को भी माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर भी सिविल इंजीनियर की मांग खाश तौर पर विकसित देशों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

किसी ग्रेजुएट सिविल इंजीनियर के लिए जॉब में अनेकों पद एवं कार्य भार हो सकते हैं। उदाहरण के लिए

1. इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजर : ये किसी प्रोजेक्ट सम्बंधित कार्य के लिए प्रस्ताव देने , प्लान करने , इंतिज़ाम करने, वित्तीय अभिलेख एवं रणनिति बनाने के साथ सुरक्षा आदि के लिए उत्तर दायी  होते है। 

2. सीनियर सिविल इंजीनियर :  विभिन्न स्ट्रक्चर जैसे बिल्डिंग, ब्रिज, हाईवे आदि के निर्माण एवं मरम्मत की योजना, डिज़ाइन एवं व्यवस्था आदि कार्यो का निर्वहन।

3. इंजीनियरिंग इंस्पेक्टर एंड रेग्युलेटरी अफसर : इनका उत्तर दायित्व विभिन्न प्रक्रियाएं, इंडस्ट्रियल इंस्ट्रूमेंट, परिवहन एवं वजन मीटर आदि का सरकार एवं इंडस्ट्रियल नियामकों के अनुसार पालन करना होता है।

4. इंजीनियर मैनेजर : ये डिपार्टमेंट अथवा फर्म के गतिविधियों को नियंत्रित करने एवं उससे सम्बंधित योजना बनाने, आयोजन करने का कार्य देखते हैं। 

5. सिविल इंजीनियर : किसी प्रोजेक्ट जैसे बिल्डिंग, ब्रिज, हाईवे आदि के निर्माण/मरम्मत आदि के लिए प्लान, डिज़ाइन एवं प्रबंधन का कार्य।

6. लैंड सर्वेयर : किसी प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए योजना, ड्राइंग एवं ऑफिसियल दस्तावेजों के लिए वैधानिक सर्वे की आवश्यकता होती है जो विभिन्न सम्पत्तियों के सीमा एवं रूप-रेखा का निर्धारण करती है। 

7. सिविल इंजीनियरिंग ड्राफ्टर : सम्बंधित तकनिकी सूचना एवं इंजीनियरिंग डिज़ाइन का निर्माण करना।

8. सिविल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजिस्ट : अपने अवधारणा व संकल्पना के आधार पर डिज़ाइन एवं ड्राइंग का निर्माण करना, उसमे होने वाले लागत जैसे लेबर, मेटेरियल कॉस्ट आदि का आंकलन करना एवं क्षेत्र/स्थल पर  जा कर निरक्षण करना आदि।

साधारणतः स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम के आधार पर सिविल इंजीनियर को विभिन्न कार्यों के लिए नियुक्त किया जाता है, उदाहरण  के लिए एक जिओ टेक्निकल इंजीनियर के पद पर कार्य करने वाले इंजीनियर को जियोलॉजी से सम्बंधित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट का संचालन करना होता है वही एक कंस्ट्रक्शन इंजीनियर की जिम्मेवारी किसी बड़े प्रोजेक्ट के प्लानिंग, निर्देशन एवं सुपरविज़न की होती है।

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सिविल इंजीनियरिंग सैलरी( Civil Engineering salary)

इंजीनियरिंग पृष्ठ भूमि के पेशेवरों में सिविल इंजीनियर एक अच्छी आय का प्रोफेशन माना जाता है। रियल स्टेट के क्षेत्र में आये उत्थान एवं गवर्नमेंट के नीतियों के कारण  भी  सिविल इंजीनियर की मांग काफी बढ़ी है। जबकि विश्वसनीय एवं योग्य  कैंडिडेट के अभाव से  रिक्त पड़े नियुक्तियों के कारण पे पैकेज में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। हमारे देश में सिविल इंजीनियर की औसत सैलरी INR 19,546 रुपये प्रति माह है। आम तौर पर एक फ्रेशर सिविल इंजीनियर की सैलरी हमारे देश में 1.2  से 1.8 लाख प्रति वर्ष ही होती है। अनुभव के साथ यह पैकेज 4 से 6 लाख तक भी हो जाती है। सैलरी पैकेज के दृष्टि कोण से प्राइवेट सेक्टर का क्षेत्र अच्छा माना जा सकता है परन्तु इसमें व्यावसायिक स्थिरता का आभाव भी शामिल होता है।

यद्वपि पिछले दो दशकों से सॉफ्टवेयर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अधिक रुझान के कारण सिविल इंजीनियरिंग की लोकप्रियता में खाशी कमी आयी है परन्तु हमारे देश की बढ़ती अर्थ व्यवस्था एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण आने वाले समय में क्वालिफाइड सिविल इंजीनियर की एक बड़ी मांग को नजर अंदाज भी नहीं किया जा सकता। वैसे भी ग्लोबल मार्केट इनसाइट के एक नए सर्वे के अनुसार 2025 तक सिविल इंजीनियरिंग का मार्केट साइज 11 .72 ट्रिलियन होने की संभावना बतायी गयी है, जो की निश्चित ही एक बड़ी संख्या है।

 

सिविल इंजीनियरिंग करियर (Civil Engineering Career)

टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र में सिविल इंजीनियरिंग एक अत्यंत ही गंभीर शाखा है, आम तौर पर बी टेक के बाद इसके विभिन्न स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम जिसे एम टेक की श्रेणी में रखा जाता है, करियर एवं रोजगार के दृष्टी से अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं। सिविल इंजीनियरिंग करियर के लिए स्पेशलाइज्ड प्रोग्राम में प्रमुखतः मैटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग, कोस्टल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग, अर्थक्वेक इंजीनियरिंग, इनविरोन्मेंटल इंजीनियरिंग, जिओटेक्निकल इंजीनियरिंग, वॉटर रिसोर्सेस इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग, फोरेंसिक इंजीनियरिंग, एवं कंट्रोल इंजीनियरिंग के नाम आते हैं।

ऐसे क्षेत्र जहां सिविल इंजीनियर प्रमुख भूमिका में है वे हैं :

1. हाउसिंग प्रोजेक्ट : इनमे टाउनशिप, अपार्टमेंट, फ्लैट व ऑफिस आदि शामिल है और यह आने वाले वर्षो में भी अच्छे अवसरों में माना जाता है।

2. इंफ्रास्ट्रक्चर : इनमे रोड, रेल, भूमिगत निर्माण, मेट्रो, एवं पावर प्लांट आदि शामिल हैं।

3. हाइड्रॉलिक्स : इसमें डैम, तटबंध, बांध,जलाशय आदि का निर्माण एवं मरम्मत आदि शामिल है।

कई विद्यार्थी डिग्री कोर्स के समापन के बाद पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स को वरीयता देते है। जिन्हे रिसर्च आदि में रूचि होती है वे डाक्टरल प्रोग्राम के लिए भी जाते हैं।