बैचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी

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By NICK JOHNSON

बैचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी (BDS) हमारे देश की एक मात्र एप्रूव्ड एवं रेकग्नाइज़्ड  प्रोफेशनल डेंटल कोर्स है। MBBS के बाद BDS ही सबसे लोकप्रिय मेडिकल कोर्स माना जाता है। 5 वर्षीय इस अंडरग्रेजुएट कोर्स में विद्यार्थियों को डेंटल साइंस एवं सर्जरी से सम्बंधित विषयो का अध्ययन कराया जाता है, जिनमे एनाटोमी, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी एवं बायोकेमिस्ट्री जैसे बुनियादी विषयों के अतरिक्त  डेंटल मटेरियल, प्रेस्लीन, ओरल पैथोलॉजी, ओरल मेडिसिन, ओरल सर्जरी, ऑर्थोडोंटिक्स एवं प्रोस्थोडोंटिक्स जैसे अनेकों विषय शामिल रहते हैं। BDS कोर्स  का संचालन “डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया” के अधीन होता है अतः कोर्स के समापन के बाद यहां रजिस्ट्रेशन करके ही प्रैक्टिस करने का  प्रावधान है। देश में लगभग 2.7 लाख डेंटिस्ट DCI (डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ) में रेजिस्टर्ड हैं जबकि हमारी जनसंख्या लगभग 133 करोड़ की है इस प्रकार लगभग 5000  लोगों का भार अकेले एक डेंटिस्ट पर पड़ता है। इस दृष्टी से सरकारों के पास प्राइवेट एवं गवर्नमेंट सेक्टर्स में डेंटिस्ट को एक बड़ी संख्या में एम्प्लॉय करने का दबाव भी है, ऐसा माना जा सकता है की आने वाले समय में जॉब के लिहाज से इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं । 

 

BDS अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के इच्क्षुक विद्यार्थी के पास10+2 में मुख्य विषय बायोलॉजी,फिजिक्स,केमिस्ट्री एवं अंग्रेजी में न्यूनतम 50% का होना अनिवार्य निर्धारित है। साथ ही अभ्यर्थियों की आयु सीमा न्यूनतम 17 वर्ष होनी चाहिए। हमारे देश में इस कोर्स के लिए एक मात्र प्रतियोगी परीक्षा NEET है। जो प्रति वर्ष दिसंबर से फरवरी के मध्य विद्यार्थियों से एप्लीकेशन फॉर्म ले कर मई के आखरी सप्ताह तक परीक्षा का आयोजन कराती है एवं पुनः जून के प्रथम सप्ताह में परिणाम घोषित करती है। देश के सभी 300 डेंटल कॉलेजों के लगभग 26000 सीट्स उपलब्ध हैं जिनमे गवर्नमेंट एवं प्राइवेट कॉलेज दोनों ही शामिल हैं, इन सीट्स का आवंटन काउंसलिंग के प्रक्रिया द्वारा करायी जाती है। आम तौर  पर NEET को क्वालीफाई करने के लिए जनरल केटेगरी को न्यूनतम 134 मार्क्स अथवा 50 पर्सेंटाइल एवं 107 मार्क्स या 40 पर्सेंटाइल SC/OBC/ST के लिए पर्याप्त होता है। परन्तु सरकारी BDS कॉलेजों में दाखिले के लिए लगभग 350 मार्क्स(जनरल) व 200 मार्क्स(SC/ST) की अपेक्षा की जाती है।

NEET के कॉन्सेलिंग की प्रक्रिया दो प्रकार से कराई जाती है। प्रथम “ऑल इंडिया कॉन्सेलिंग” द्वारा जिसमे प्रत्येक राज्यों के कॉलेजों के 15% सीट्स शामिल होते हैं एवं अभ्यर्थी जिन्होंने NEET क्वालीफाई किया हो वें  देश के सभी कॉलेजों के लिए आवेदन कर सकतें  हैं। “ऑल इंडिया कॉन्सेलिंग” का  नियंत्रण मेडिकल कॉन्सेलिंग कमिटी(MCC) के अधीन होता है जहां वें अभ्यर्थी के मेरिट, केटेगरी, एवं सीट्स की उपलब्धता के आधार पर आवंटन करते हैं। शेष बचे 85% सीट्स के लिए सभी राज्य “स्टेट काउंसलिंग“ द्वारा अपने अधिवासी (domicile) प्रत्याशियों हेतु काउंसलिंग की प्रक्रिया का आयोजन करते हैं हालाँकि इसमें अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी भाग लेते हैं परन्तु अधिकांश अवसरों पर इन्हे निजी कॉलेजों के सीट्स ही उपलब्ध हो पाते हैं। काउंसलिंग की प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यमों द्वारा विभिन्न राज्यों के अपने वेब साइट पर उपलब्ध रहते हैं।  साधारणतः सरकारी BDS कॉलेजों की फी INR 1 से INR 5 लाख के मध्य होता है जबकि प्राइवेट निजी कॉलेजों की फी INR 30 से INR 35 लाख तक होती है।

देश के टॉप डेंटल कॉलेजेस में मौलाना आज़ाद इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेंटल साइंस (नई दिल्ली), फैकल्टी ऑफ़ डेंटल साइंस किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ, फैकल्टी ऑफ़ डेंटल साइंस IMS BHU वाराणसी, मनिपाल कॉलेज ऑफ़ डेंटल साइंस मनिपाल, नायर हॉस्पिटल डेंटल कॉलेज मुंबई, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल मुंबई, क्रिश्चियन डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल लुधियाना,  मनिपाल कॉलेज ऑफ़ डेंटल साइंस मैंगलुरु, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नागपुर, डॉ आर अहमद डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कोलकाता, फैकल्टी ऑफ़ डेंटल साइंस रमैयाह यूनिवर्सिटी ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज बेंगलुरु इत्यादि नाम प्रमुख हैं।  

BDS के समापन के अवसर पर विद्यार्थियों के सामने दो विकल्प होते हैं। अधिकांश विद्यार्थी जॉब की दिशा में जाना पसंद करते हैं जबकि कुछ हायर स्टडी का चुनाव करते हैं। गवर्नमेंट सेक्टर में इंडियन आर्मी, नेवी एवं एयरफोर्स के अतिरिक्त इंडियन रेलवे में इनके लिए एम्प्लॉयमेंट की संभावनाएं होती हैं, सभी पब्लिक सेक्टर यूनिट्स जैसे NTPC, BHEL, HFCL, ONGC  इत्यादि संस्थानों में इन्हे एलिजिबिलिटी, एक्सपीरियन्स एवं वेकन्सी के आधार पर नौकरियां मिलती हैं। राज्य सरकारों द्वारा भी डेंटल सर्जन की नियुक्ति की जाती है। इसके अतिरिक्त इनके पास प्राइवेट हॉस्पिटल या इंस्टीटूशन में जॉब करने के अलावे निजी क्लिनिक स्थापित कर के प्रैक्टिस करने के अवसर भी उपलब्ध रहता हैं। BDS के बाद कई पेशेवर डेंटिस्ट गल्फ कन्ट्रीज की तरफ रुख करते हैं, जहां रेक्रुइटर्स की अच्छी संख्या के साथ साथ अन्य देशों अपेक्षाकृत अधिक सुविधा उपलब्ध रहती हैं। साधारणतः गल्फ कन्ट्रीज में सैलरी का रेंज INR 80,000 से INR 1.5 लाख तक रहता है।

हायर स्टडी का चुनाव करते समय भी BDS प्रोफेशनल के समक्ष दो विकल्प होते हैं। या तो वें NBDE, NDEB, जैसे एग्जाम्स की तैयारी कर के US अथवा कनाडा में स्थापित हो जाये जहां इन्हे विश्व स्तर पर सर्वाधिक सैलेरी पैकेज मिलती है। हालाँकि इसे एक कठिनतम परीक्षाओं में माना जाता है। विकल्प का दूसरा पक्ष देश में हायर स्टडीज का है जहां विभिन्न हेल्थ केयर फील्ड में मास्टर किया जाता है, जैसे मास्टर ऑफ़ डेंटल सर्जरी (MDS), मास्टर ऑफ़ पब्लिक हेल्थ (MPH), मास्टर इन हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन, MBA इन हेल्थ केयर मैनजमेंट एवं MBA इन हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट इत्यादि। कुछ अन्य लोकप्रिय MDS स्पेशलाइजेशन भी हैं जैसे MDS इन कम्युनिटी डेंटिस्ट्री, MDS इन ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलोजी, MDS इन पेडोडोंटिक्स , MDS इन प्रोस्थोडोंटिक्स, MDS इन ओरल पैथोलॉजी इत्यादि।