बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी

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By NICK JOHNSON

भारत के प्राचीनतम विधाओं में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति वैदिक काल से चली आ रही है। औषधि एवं प्राकृतिक अनुसंधानों द्वारा मानव शरीर एवं स्वास्थ के रक्षा  का यह विज्ञान आज के आधुनिक युग में पुनः अपना स्थान प्राप्त कर चुकी है। बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) में  पारम्परिक आयुर्वेद एवं मॉडर्न मेडिसिन इन दोनों का ही संयुक्त रूप से अध्ययन किया जाता है। BAMS की पेशेवर ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त करने पर आयुर्वेदाचार्य की उपाधि दी जाती है जो की नाम के आगे वैद्यार अथवा Vr के रूप में अलंकृत होती है। इस 5.5 वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में विद्यार्थियों को आयुर्वेद के विभिन्न विषयों के साथ  विस्तृत स्तर पर फिजियोलॉजी, मॉडर्न एनाटोमी, फार्माकोलॉजी, मेडिसिन, फोरेंसिक मेडिसिन, रूल्स एंड प्रिंसिपल्स ऑफ़ सर्जरी, लीगल ड्रग्स, हर्बल साइंस, ENT  इत्यादि का भी  अध्ययन करना होता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में आयुर्वेदिक मेडिसिन की लोकप्रियता काफी बढ़ी है, न केवल हमारे देश में बल्कि पश्चिमी दुनिया में भी इसके बगैर किसी साइड इफ़ेक्ट का होने एवं नेचुरल हीलिंग प्रॉपर्टीज के कारण काफी मांग देखने को मिलती है। BAMS के 5.5 वर्षीय प्रोगाम में विद्यार्थियों को आयुर्वेद के मौलिक शिक्षा के साथ पेशेवर स्तर पर स्वास्थ सम्बंधित क्षेत्रों में कार्य करने के लिए तैयार किया जाता है जहां ये सक्षम प्रैक्टिशनर, टीचर, रिसर्चर, या फिजिशियन अथवा सर्जन के रूप में कार्य कर सकें। विगत वर्षों में BAMS का महत्त्व केवल कुछ सरकारी अथवा निजी इंस्टीटूशन तक ही सिमित था परन्तु वर्तमान समय में क्लीनिकल प्रैक्टिस, अकादमिक, रिसर्च, एडमिनिस्ट्रेशन एवं ड्रग मैन्युफैक्चरिंग जैसे अनेकों संभावनाओं के उपलब्ध होने के साथ विभिन्न स्वास्थ सम्बंधित जटिलताएं जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर यहाँ तक की कैंसर इत्यादि में भी इसका समुचित प्रभाव देखने को मिलने लगा है। मानसिक तनाव एवं दीर्घ जीवन जैसे विषयों पर भी  लोगो में आयुर्वेद के प्रति आस्था अब अधिक बढ़ी है।

BAMS के 5 वर्ष एवं 6 माह के इस प्रोग्राम में क्लास रूम ट्रेनिंग, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, वर्कशॉप एवं कांफ्रेंस के अतिरिक्त 1 वर्ष का इंटर्नशिप भी अनिवार्य  रहता है। इस पुरे अविधि में संस्कृत भी  विषय के रूप में निरंतर शामिल रहता है। 1.5 वर्षों में विभाजित  तीन चरणों के इस कोर्स में  आयुर्वेदिक फिलोसॉफी, हिस्ट्री ऑफ़ आयुर्वेद, टॉक्सिकोलॉजी, एनाटोमी, फिजियोलॉजी, जनरल सर्जरी एंड पारा सर्जिकल टेक्निक्स, पंचकर्म,  पल्स डायग्नोसिस,फार्मास्युटिकल्स, पैथोलॉजी एव गायनेकोलॉजी इत्यादि का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।

BAMS  अंडर ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के इच्क्षुक विद्यार्थी के पास 10+2 में मुख्य विषय बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री  में न्यूनतम 50% का होना अनिवार्य निर्धारित है। साथ ही अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए । हमारे देश में इस कोर्स के लिए एक मात्र प्रतियोगी परीक्षा NEET है। जो प्रति वर्ष दिसंबर से फेब्रुअरी के मध्य विद्यार्थी से एप्लीकेशन फॉर्म ले कर मई के आखरी सप्ताह तक परीक्षा का आयोजन कराती है एवं पुनः जून के प्रथम सप्ताह में परिणाम घोषित  करती है।

देश में BAMS कोर्स के लिए सरकारी एवं निजी कॉलेजों की कुल संख्या केवल 247 है जिनमे 320 सीट्स गवर्नमेंट कॉलेजेस में एवं 2430 सीट्स प्राइवेट कॉलेजेस में उपलब्ध हैं। NEET की परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा प्रति वर्ष आयोजित की जाती है। परिणाम घोषित होने के बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर सेंट्रलाइज़्ड कौन्सेल्लिंग की प्रक्रिया  द्वारा सीट्स का आवंटन किया जाता है। कौन्सेलिंग की प्रक्रिया स्टेट कोटा के अंतर्गत भी की जाती है, अधिकांश राज्य, सरकारी कॉलेजेस में अपने अधिवासी (डोमिसाइल) कैंडिडेट को ही वरीयता देते है। कई राज्यों में अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में भाग तक लेने की अनुमति नहीं है। एडमिशन की प्रक्रिया NEET में प्राप्त अंको के आधार पर होता है। हर वर्ष NEET में लगभग 15 लाख प्रत्याशी भाग लेते हैं जिनमे लगभग 8 लाख क्वालीफाई करते हैं ऐसे में सरकारी कॉलेजेस में सीट प्राप्त करने के लिए 520 से अधिक अंको की अपेक्षा की जाती है।

देश के कुछ  प्रमुख BAMS कॉलेजों में बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी (BHU) वाराणसी, इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (IMS) वाराणसी, आयुर्वेदिक एंड यूनानी तिब्बिआ कॉलेज (नई दिल्ली), नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद (जयपुर), राजीव गाँधी यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंस (बंगलौर) आदि शामिल हैं। इन संस्थाओं की कुल फी INR 5,0000 से INR 2,50,000 तक होती है। जबकि निजी कॉलेजों की फी 15 से 25 लाख तक हो सकती है।  उत्तर प्रदेश स्थित कुछ राजकीय कॉलेजेस के नाम हैं :-

राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय लखनऊ

राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय वाराणसी

बुन्देलखण्ड राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय झॉसी

लाल बहादुर शास्त्री राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय हण्डिया, प्रयागराज (इलाहाबाद)

एस0आर0एम0 राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय बरेली

राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय अतर्रा-बांदा

स्वामी कल्याण देव राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय, रामपुर-मुजफ्फरनगर

राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एंव चिकित्सालय, पीलीभीत.

वर्तमान समय में आयुर्वेद का  क्षेत्र अनेको संभावनाओं से भरा पड़ा है.ग्रेजुएशन के बाद गवर्नमेंट या निजी क्लीनिक में आयुर्वेदिक स्पेशलिस्ट, आयुर्वेद ड्रग स्पेशलिस्ट के रूप में कार्य करने के अतिरिक्त बतौर बिज़नेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव  व्यवसाय में भी करियर बना सकते हैं अथवा  डॉक्टर बनने के बाद चाहे तो रीसर्च इंडस्ट्री में कार्य कर सकते है। कई कम्पनियाँ इन्हें  मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव, केटेगरी मैनेजर, आयुर्वेद फार्मासिस्ट, सेल्स मैनेजर, प्रोडक्ट मैनेजर एवं आयुर्वेद डॉक्टर जैसे पदों पर नियुक्ति देती हैं। फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज, नर्शिंग होम, डिस्पेंसरीज, रीसर्च इंस्टिट्यूट या इन्शुरन्स इंडस्ट्रीज इत्यादि में भी इनके लिए अनेकों संभावनाएं उपलब्ध हैं।  किसी आयुर्वेद डॉक्टर की औसत सैलरी INR 5 लाख से INR 15 लाख प्रति वर्ष तक  होती है।  इसके अतिरिक्त आयुर्वेदिक प्राइवेट  प्रैक्टिस जैसे पंचभौतिक चिकित्सा, नाड़ी परीक्षा, धातु चिकित्सा जैसे पारम्परिक विधियों द्वारा भी स्वास्थ के क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं। इन दिनों पंचकर्म ,योग, आयुर्वेदिक डाइएटिक्स,फैसिओथेरेपी इत्यादि भी खूब प्रचलन में हैं। 

हायर एजुकेशन के सन्दर्भ में BAMS ग्रेजुएट्स , क्लीनिकल रीसर्च, पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र  में MD इन आयुर्वेद  के अतिरिक्त MBA अथवा LLB जैसे अन्य क्षेत्रो में भी करियर बना सकते हैं।   

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