B.Com अथवा बैचलर ऑफ़ कॉमर्स

By Ajay Mishra

3 वर्षीय अंडरग्रेजुएट कोर्स के श्रेणी में BCom अथवा बैचलर ऑफ़ कॉमर्स एक लोकप्रिय कोर्स है, जिसे रेगुलर अथवा डिस्टेंट एजुकेशन मोड के माध्यम से किया जाता है। इस कोर्स के 3 स्वरूप हैं जैसे बी कॉम (जनरल), बी कॉम(ऑनर्स) एवं बी कॉम(एल एल बी)। विभिन्न यूनिवर्सिटीज में बी.कॉम या  बी.कॉम (जनरल) को बी.कॉम पास की संज्ञा भी दी जाती है। बी.कॉम के प्रोग्राम को 6 सेमेस्टर में विभाजित किया गया है जहां कैंडिडेट बाणिज्य के मूल विषय जैसे फाइनेंसियल एकाउंटिंग, कॉर्पोरेट टैक्स, इकोनॉमिक्स, कंपनी लॉ, ऑडिटिंग एवं बिज़नेस मैनेजमेंट आदि का अध्ययन करतें हैं। यह कोर्स एक विस्तृत स्तर पर मैनेजेरियल एवं उद्यमी स्किल विकसित करता है जिसके माध्यम से व्यवसाय से सम्बंधित अनेकों कारक जैसे इम्पोर्ट एक्सपोर्ट लॉ, इकनोमिक पॉलिसी एवं एकाउंटिंग के सिद्धांत आदि के ज्ञान द्वारा  कैंडिडेट की प्रोफाइल सुसज्जित होती है। ऐसे विद्यार्थी जिनकी रूचि कॉमर्स, एकाउंटिंग, फाइनेंस, बैंकिंग, मार्केटिंग, ट्रेवल एंड टूरिज्म अथवा इंस्युरेन्स के क्षेत्रों में हों उनके लिए बी कॉम एक ठोस विकल्प सिद्ध होता है। यह उन विद्यार्थियों के लिए भी एक आदर्श कोर्स है जो चार्टेड एकाउंटेंसी, कॉस्ट एकाउंटिंग, अथवा कंपनी सेक्रेटरी जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों में रूचि रखते है।

 

वर्तमान समय में B.Com, विद्यार्थियों के मध्य कई कारणों से लोकप्रिय है जैसे इस कोर्स के बाद जॉब की संभावनाए  कमर्शियल बैंकिंग, फाइनेंसियल सर्विसेज, टैक्स एडवाइजरी सर्विसेज, एकाउंटिंग एवं ऑडिटिंग आदि अनेकों  क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक है। जहां इन्हे अच्छे  पैकेज के साथ एकाउंट एग्जीक्यूटिव, फाइनेंसियल एनालिस्ट, ऑपरेशन मैनेजर अथवा अकाउंटेंट आदि के पद ऑफर किये जाते हैं। करियर के दृष्टि से भी यदि विद्यार्थी में क्षमता एवं निश्चय हो तो वह विभिन्न पेशेवर कोर्स जैसे CA, CS अथवा बिज़नेस मैनेजमेंट कोर्स PGDM या MBA आदि कर के अपने महत्वाकांक्षाओ की पूर्ति कर सकतें  है।  B.Com के बाद  स्पेशलाइजेशन करने के भी अनेको विकल्प उपलब्ध हैं जैसे बी.कॉम एकाउंटेंसी, बी.कॉम बैंकिंग मैनेजमेंट, बी.कॉम कंप्यूटर एप्लीकेशन, बी.कॉम इ कॉमर्स, बी.कॉम इकोनॉमिक्स, बी.कॉम फॉरेन ट्रेड मैनेजमेंट, बी.कॉम मैनेजमेंट स्टडीज, बी.कॉम टैक्सेशन आदि, जिनके माध्यम से विभिन्न इंडस्ट्रीज में जैसे ऑडिट फर्म्स, कॉर्पोरेट, अकाउंट फर्म्स, कंसल्टेंसी, सेल्स एंड मार्केटिंग, ह्यूमन रिसोर्सेस, फॉरेन ट्रेड, बैंक एवं इंस्युरेन्स कम्पनीज के अलावे एडवरटाइजिंग, लॉ, जर्नलिज्म, मास कम्युनिकेशन डिज़ाइन आदि क्षेत्रों  में भी  जॉब प्राप्त की जा सकती है।

 

लगभग सभी यूनिवर्सिटीज अथवा कॉलेजों में बी कॉम कोर्स का संचालन किया जाता है। इस कोर्स में दाखिले के लिए न्यूनतम अहर्ता किसी रेकग्नाइज़्ड बोर्ड द्वारा 10+2  में 50% अंको की है। जहां अभ्यर्थी के मूल विषय गणित एवं अंग्रेजी के अतिरिक्त इकोनॉमिक्स, एकाउंटेंसी व बिज़नेस स्टडीज आदि आपेक्षित होते हैं । यद्वपि ये अहर्ता विभिन्न कॉलेजों या यूनिवर्सिटीज में अलग अलग हो सकती है। साधारणतः एडमिशन की प्रक्रिया मेरिट के आधार पर की जाती है परन्तु कई यूनिवर्सिटी जैसे बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ, दिल्ली यूनिवर्सिटी , क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, AMU आदि अपने यहां एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन के उपरांत ही दाखिले  की प्रक्रिया एवं ओपचारिकताएं पूरी करती हैं।

 

विशेषज्ञता एवं पेशेवर कोर्सेज के मध्य  केवल बी कॉम की डिग्री आज के वर्तमान दौर में पर्याप्त नहीं मानी जाती । विद्यार्थियों से ये अपेक्षा रहती है की वें विभिन्न पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज जैसे एम कॉम, एम बी ए, सी ए अथवा सी एस को भी अपने प्रोफाइल में शामिल करें। हालाँकि बी कॉम ग्रेजुएट गवर्नमेंट सेक्टर में आयोजित होने वाले विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले सकते हैं अथवा वें जिन्हे ग्रेजुएशन के तत्काल बाद जॉब की आवश्यकता है, उनके लिए एकाउंटिंग, कॉमर्स, बैंकिंग एंड फाइनेंस से सम्बंधित क्षेत्रो में जूनियर लेवल पर जॉब उपलब्ध होते हैं।    

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