एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग

कोर्स, एडमिशन, जॉब, सैलरी, करियर

By अजय मिश्रा

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग कोर्स क्या है

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग ,एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एवं एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग, ये तीनों स्ट्रीम्स  एविएसन से सम्बंधित होने के बावजूद भी अपने  कोर्स एवं  करियर के दृष्टि से भिन्न हैं। जहाँ एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्टूडेंट को एयरक्राफ्ट के निर्माण,टेस्टिंग,डिज़ाइन के अलावे मिसाइल ,स्पेस शटल ,राकेट एवं स्पेस स्टेशन से  सम्बंधित ज्ञान दिया जाता है वहीं ,एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में एयरोप्लेन अथवा  हेलीकाप्टर के डिज़ाइन व  निर्माण पर विशेषज्ञता प्रदान की जाती है । एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में विशेष रूप से स्पेसक्राफ्ट डिज़ाइन ,एस्ट्रोनॉट ,जेट प्रोपल्शन ,स्पेसक्राफ्ट डायनामिक्स एवं ऑर्बिटल मैकेनिज्म इत्यादि विषय प्रमुख होते हैं  वहीं  एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में थर्मोडायनामिक्स, हीट ट्रांसफर, फ्लाइट मैकेनिक्स एवं एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर ,स्टेबिलिटी एवं कण्ट्रोल जैसे विषयों  पर अध्ययन कराया जाता है। 

एवियेशन से सम्बंधित कोर्सेज में एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र एयरक्राफ्ट मेंटनेंस इंजीनियरिंग (AME) का है जहाँ स्टूडेंट को विभिन्न एयरक्राफ्ट सम्बंधित मेकैनिकल पार्ट्स जैसे :- इंजन, लैंडिंग गियर, fuselage(हवाई जहाज़ का ढांचा) के अतिरिक्त रडार सिस्टम, इलेक्ट्रिकल सिस्टम,  इंस्ट्रूमेंट सिस्टम, रेडियो एवं नेविगेशन सिस्टम के रख रखाव अथवा मेंटनेंस सम्बंधित विषयों  पर अध्ययन कराया जाता है। चूँकि किसी विमान के संचालन में उसके सुरक्षा के नियामक महत्वपूर्ण होते हैं अतः एयरक्राफ्ट मेंटनेंस इंजीनियर को उसके कार्य भार ग्रहण करने से पहले सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त करने की व्यवस्था की गयी है। किसी भी विमान को उड़ान भरने से पहले AME के अप्रूवल की आवश्यकता होती है। विमान एवं उसके यात्रियों की सुरक्षा में एयरक्राफ्ट मेंटनेंस इंजीनियर का कॉन्ट्रिब्यूशन काफी महत्वपूर्ण होता है ।

 AME कॉलेजो में यह कोर्स विभिन्न श्रेणी में विभक्त है। जिसे  A लाइसेंस एवं B लाइसेंस के  स्वरूप में  विद्यार्थियों को दिया जाता है। A लाइसेंस 4 भागों (A1 A2 ,A3 ,एवं A4 ) में विभाजित हैं जिन्हे एयरोप्लेन एवं हेलीकाप्टर के इंजन के स्वरूप ( टरबाइन अथवा पिस्टन ) के आधार पर साधारण मेंटनेंस के लिए दिया जाता है। जबकि  लाइसेंस B दो भागो (B1 एवं B2) में विभाजित है, B1 लाइसेंस  विमान के मैंटेनैंस ,रिपेयर एवं विभिन्न मेकैनिकल सिस्टम जैसे लैंडिंग गियर, एयर फ्रेम ,इंजन इत्यादि से सम्बंधित होता है।  यह लाइसेंस भी विमान के  इंजन के स्वरूप ( टरबाइन अथवा पिस्टन ) के आधार पर B1.1 से B1.4 तक चार श्रेणियों में बांटा गया है।

 B2 लाइसेंस का सम्बन्ध विमान के इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट पुर्जो से है जिनमे राडार सिस्टम, इंस्ट्रुमेंटल सिस्टम एवं रेडियो एंड नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं।

हमारे देश में  DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लगभग 117 एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस कॉलेज है जो अंतराष्ट्रीय स्तर के लाइसेंस प्रदान करने वाले कोर्सेज का संचालन करते है।  AME का यह कोर्स  दो अलग अलग तरह से करायी जाती है । एक में जहाँ एक साल का एकेडेमिक प्रोग्राम चला कर  फिर एक साल का प्रैक्टिकल ट्रैनिंग दी जाती है वही दूसरे तरह के कोर्स में अकेडेनिक प्रोग्राम का  ड्यूरेशन दो साल का होता है और फिर दो साल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के बाद लाइसेंस दी जाती है। ट्रैनिंग की पूरी प्रक्रिया DGCA द्वारा एप्रूव्ड आर्गेनाईजेशन जैसे एयरलाइन, MRO( मेंटेनेंस,रिपेयर ऑपरेशन) में  करायी जाती है, जहाँ कैंडिडेट को बतौर स्टाइपेंड 15 से 20 हजार तक प्रति महीने दिया जाता है।

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग सिलेबस

सेमेस्टर 1

मैथेमेटिक्स 1

फिजिक्स 1

केमिस्ट्री

बेसिक्स ऑफ़ मैकेनिक्स

सिविल इंजीनियरिंग बेसिक्स

एयरोनॉटिकल एंड एविएशन

कम्युनिकेटिव इंग्लिश

 प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 2

मैथेमेटिक्स 2

फिजिक्स 2

मटेरियल साइंस

थर्मोडायनामिक्स

बेसिक ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग

इनविरोन्मेंटल इंजीनियरिंग

प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 3

 मैथमेटिक्स 3

 एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर 1

 एयरक्राफ्ट परफॉरमेंस

 बीम्स एंड ट्रसएज

 बॉडी डिज़ाइन 1

 प्रिंसिपल ऑफ़ ऐरोडाइनामिक्स

 प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 4

एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर 2

प्रोपल्शन सिस्टम

फंडामेंटल ऑफ़ गैस टरबाइन इंजन

टर्निंग परफॉर्मेंस स्टडी

बॉडी डिज़ाइन 2

ड्राफ्टिंग टेक्निक्स

 प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 5

एयरक्राफ्ट स्टेबिलिटी एंड कण्ट्रोल

एक्सपेरिमेंटल स्ट्रेस एनालिसिस

इलेक्टिव 1

एडवांस प्रोपल्शन टेक्निक

मिसाइल प्रोपल्शन

कण्ट्रोल ऑफ़ एयरक्राफ्ट

मेंटेनेंस ऑफ़ एयरक्राफ्ट 1

प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 6

प्रिंसिपल ऑफ़ इनविरोन्मेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग

प्रोफेशनल एथिक्स

मैनेजमेंट साइंस

मेंटेनेंस ऑफ़ एयरक्राफ्ट 2

टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट

इलेक्टिव सब्जेक्ट 2

प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 7

सेफ्टी ऑफ़ एयरक्राफ्ट

इमरजेंसी ऑपरेशन

ग्लोबल एविएशन सेक्टर

इलेक्टिव  सब्जेक्ट 3

माइनर प्रोजेक्ट

प्रैक्टिकल लैब

सेमेस्टर 8

GPSटेक्नोलॉजी

एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल

पर्सनल मैनेजमेंट

इलेक्टिव 4

मेजर प्रोजेक्ट

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एडमिशन

AME कॉलेजेस में एडमिशन के लिए  एंट्रेंस एग्जाम में पार्टिसिपेट करने हेतु  कैंडिडेट के पास 10+2(PCM) में न्यूनतम 50% अथवा किसी रेकग्नाइज़्ड बोर्ड या यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल / मकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की अनिवार्यता होती है। AME CET के वेबसाइट www.amecet.in पर उपलब्ध एप्लीकेशन फॉर्म द्वारा एग्जाम एवं कौन्सेलिंग की प्रक्रिया का आरम्भ कर सकते हैं।दरअसल  एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (AME CET) नेशनल लेवल पर आयोजित एंट्रेंस एग्जाम है जो आल इंडिया कौंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE), एवं डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) भारत सरकार द्वारा एफिलिएटेड विभिन्न कॉलेजेस में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग ,एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एवं एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग जैसे प्रोग्राम के लिए एडमिशन सुनिश्चित करती है । हालाँकि कई कॉलेजेस व इंस्टीटूशन अन्य एंट्रेंस एग्ज़ाम्स जैसे JEE Main & Advance, COMEDK, UGET, KCET, SAEEE, एवं UPSEE आदि के स्कोर के आधार पर भी एडमिशन लेते हैं।

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग के लिए NITs एवं IIT कानपुर व चेन्नई के अतिरिक्त देश के कुछ अन्य प्रतिष्ठित संस्थान  है

एमिटी यूनिवर्सिटी नॉएडा

राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा

 गुरुग्राम इंस्टिट्यूट ऑफ़ एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी नागपुर

बाबू बनारसी दास यूनिवर्सिटी लखनऊ

फिरोज गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश

 पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़

 दया नन्द सागर कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग बैंगलोर

VIT  भोपाल यूनिवर्सिटी

 ACS कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग बैंगलोर

 हिमांचल कॉलेज ऑफ़ एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग सोलन

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग जॉब एवं करियर

AME की तरह एयरोस्पेस एवं एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की स्ट्रीम भी काफी प्रॉमिसिंग और प्रेस्टिजियस है। ये दोनों, एयरोस्पेस एवं एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के श्रेणी में आते है। एयरोस्पेस इंजीनियर के लिए प्राइवेट सेक्टर के साथ गवर्नमेंट सेक्टर जैसे एयर फाॅर्स , डिफेन्स मिनिस्ट्री , गवर्नमेंट एयर सर्विसेज (एयर इंडिया ), ISRO, DRDO, हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड(HAL)  के अतिरिक्त कॉर्पोरेट रिसर्च कम्पनीज , एयरलाइन, एवं  हेलीकाप्टर एंड  एविएशन कम्पनीज जैसे टाटा एडवांस सिस्टम, तनेजा एयरोस्पेस, महिंद्रा एरोस्पेस, पवन हंस हेलीकाप्टर इत्यादि में करियर की संभावनाएं हैं। 

यद्वपि एयरोनॉटिकल इंजीनियर के लिए भी संभावनाओं की कमी नहीं, हमारे देश में कई सरकारी संस्थान इन्हे हाई पे स्केल पर नियुक्ति देती हैं  परन्तु विदेश के किसी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री लेने के बाद विश्व के कई बड़े स्पेस सेण्टर में जॉब करने का अवसर मिलने लगते  है। ISRO, NASA, DRDO के अतिरिक्त एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी(ADA), एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट(ADE), नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरीज(NAL)इत्यादि में इनकी मांग सदैव बनी रहती है।  

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग सैलरी

एरोनोटिकल इंजीनियर की औसत सैलरी देश में लगभग 6 लाख प्रति वर्ष है। विभिन्न पदों के अनुसार इसमें अंतर पाया जाता है  जैसे

डिज़ाइन इंजीनियर INR 2.0-2.4 लाख  वर्ष

मेंटेनेंस इंजीनियर INR 1.9-2.4 लाख  वर्ष

अवियोनिक इंजीनियर INR 1.8-2.3 लाख  वर्ष

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर INR 2.2-2.3 लाख  वर्ष        

मैकेनिकल इंजीनियरINR 2-2.6 लाख  वर्ष

कम्पनयों के अनुसार सैलरी का एक संक्षिप व्यौरा  प्रकार है

एयर इंडिया एयरोनॉटिकल इंजीनियर ₹ 1,16,363 प्रति माह 

 सिंगापुर एयर लाइन्स  एयरोनॉटिकल इंजीनियर ₹ 1,10,000प्रति माह

फ्लाइंग जेट एयरोनॉटिकल इंजीनियर ₹ 46,424 प्रति माह

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एयरोनॉटिकल इंजीनियर ₹ 31,871प्रति माह