डिप्लोमा इन लेबर लॉ

मानव संसाधन की भूमिका किसी भी देश के आर्थिक एवं व्यावसायिक तंत्र के लिए हमेशा से ही महत्वपूर्ण रही है। भारत में लेबर लॉ एवं ट्रेड यूनियन का अस्तित्व ब्रिटिश काल से देखा जा सकता है, जहां इनके हितों की रक्षा एवं कार्यो के मूल्यांकन के लिए समय समय पर विभिन्न नियम आदि निर्धारित किये गए। स्वतंत्रता के उपरांत ये लेबर यूनियन अधिक संगठित एवं व्यापक रूप से स्थापित हुए। विभिन्न परियोजनाओं में प्रयुक्त किये जाने वाले कर्मियों के सन्दर्भ में आवश्यक मैनेजमेंट, शिकायतों का निवारण आदि विषयों के लिए इंडस्ट्रीज में, लेबर लॉ से संबंधित पेशेवर की नियुक्ति को स्वीकारा गया, जिससे उत्पादन की क्षमता एवं स्थिरता आदि विषयों के संचालन में विशेषज्ञता का प्रभाव प्राप्त किया जा सके।

डिप्लोमा इन लेबर लॉ इसी क्षेत्र से सम्बंधित एक एकेडेमिक स्टडी है जो कैंडिडेट को इंडस्ट्रीज के मांग के अनरूप नियमों के सम्बन्ध में आवश्यक ज्ञान एवं स्किल प्रदान करती है, जिससे ऐकडेमिक एवं टेक्निकल योग्यताओं से युक्त लेबर लॉ के एक्सपर्ट्स व्यावहारिक धरातल पर उत्पन्न चुनौतियों का निस्तारण कर सकें।

डिप्लोमा इन लेबर लॉ में दाखिला लेने के लिए अभ्यर्थी  के पास किसी रेकग्नाइज़्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ग्रेजुएशन लेवल की परीक्षा न्यूनतम 55%(आरक्षित कैटेगरी के लिए 45% या 50%) के साथ पास होना आवश्यक है। अधिकांश इंस्टीटूशन एंट्रेंस टेस्ट का आयोजन करते है जबकि कई वर्क एक्सपीरियन्स की भी मांग करते हैं।

ऐसे विद्यार्थी जिनकी पृष्ठ्भूमि ह्यूमन रिसोर्सेस मैनेजमेंट रही हो या जिन्होंने लीगल क्षेत्र से ग्रेजुएशन किया हो अथवा जो बतौर HR मैनेजर अपना करियर बनाना चाहतें हों उनके लिए डिप्लोमा इन लेबर लॉ एक सर्वाधिक रोजगारपरक कोर्स सिद्ध हो सकता है। इस कोर्स के लिए उपयुक्त कुछ लोकप्रिय कॉलेज हैं १. आनंद लॉ कॉलेज गुजरात, २.भारती विद्यापीठ पुणे, ३.सेंट्रल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज नागपुर, गुजरात यूनिवर्सिटी आदि   

इस कोर्स की फी विभिन्न कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटीज में लगभग INR 9,000 से 45,000 के मध्य होती है.जो कॉलेज के लोकेशन अथवा उसके गवर्नमेंट अथवा निजी होने पर निर्भर करती है।

DLL के बाद कैंडिडेट के समक्ष  करियर के दृष्टि से अनेको अवसर  उपलब्ध रहतें हैं।  विभिन्न इंडस्ट्रीज में प्रोविडेंट फण्ड मैनेजर, NGO वर्कर, ह्यूमन रिसोर्सेस मैनेजर, EPFO अफसर, कंसलटेंट एवं लीगल एक्सपर्ट्स जैसे पदों पर इनकी मांग सदा बनी रहती है।       

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