डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी

12वी के बाद तत्काल जॉब प्राप्ति के उद्देश्य से किये जाने वाले विभिन्न डिप्लोमा कोर्सेज में DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी) के 2 वर्षीय प्रोग्राम का विशिष्ट महत्व है। ऐसे विद्यार्थी जिन्हें  मेडिकल लेबोरेटरी तकनीशियन के तौर पर एंट्री लेवल जॉब करने में रूचि हो उनके लिए DMLT एक बेहतर संभावना सिद्ध हो सकती है। मेडिकल लेबोरेटरी तकनीशियन दरअसल एक हेल्थ केयर प्रोफेशनल होता है जिसके द्वारा की गई जांच(डायग्नोसिस) के आधार पर ही डॉक्टर्स या फिज़ीशियन मेडिसिन प्रेस्क्राइब करते हैं। चिकित्सा जगत में क्लीनिकल लेबोरेटरी टेस्ट के बढ़ते प्रभाव के कारण इस पैरामेडिकल कोर्स की प्रासंगिकता (Relevance) और भी अधिक हुई है। इस प्रोग्राम में क्लास रूम ट्रेनिंग, सेमिनार एवं फंडामेंटल प्रैक्टिकल लैब ट्रेनिंग के माध्यम से विद्यार्थियों में विषय से सम्बंधित पेशेवर ज्ञान दिया जाता है। 

प्रोग्राम के प्रथम वर्ष में इनके मुख्य विषय, बेसिक्स इन लेबोरेटरी इक्विप्मेंट्स एंड केमिस्ट्री, बेसिक हेमाटोलॉजी (रक्तविज्ञान), ब्लड बैंकिंग एंड इम्यून हेमटोलॉजी एवं क्लीनिकल पैथोलॉजी एंड परसिटोलॉजी होते हैं जबकि द्वितीय एवं आखरी साल में  क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी एवं हिस्टोपैथोलॉजी एंड साइटोलॉजी इत्यादि विषय पढ़ाया जाता है।

डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी के 2 वर्षीय प्रोग्राम में एडमिशन लेने के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम अहर्ता (Qualification) 10+2 है जो विद्यार्थी द्वारा साइंस विषयों में न्यूनतम 50% अंको के साथ किसी रेकग्नाइज़्ड एजुकेशनल बोर्ड द्वारा प्राप्त किया गया हो। यद्वपि इस प्रोग्राम में एडमिशन के लिए किसी स्पेशल एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन नहीं किया जाता परन्तु  कुछ प्रतिष्ठित गवर्नमेंट कॉलेज इस कोर्स के लिए रिटेन टेस्ट का आयोजन भी करते है।  चूँकि यह कोर्स मेडिकल आधारित होता है अतः इसमें बायोलॉजी के प्रश्नों की प्रमुखता रहती है। इस प्रकार कई कॉलेजों में एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर दाखिला दिया जाता है जबकि कुछ इंस्टीटूशन्स 10+2 में परफॉरमेंस के आधार पर डायरेक्ट एडमिशन देते हैं।   साधरणतः इस कोर्स की फी INR 20,000-80,000 तक होती है परन्तु कई गवर्नमेंट कॉलेजेस में काफी कम फी पर भी यह कोर्स मुहैया करायी जाती है।

देश के कुछ प्रमुख DMLT कॉलेजों में सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज बैंगलोर, अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ, SRM इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कांचीपुरम, मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज चेन्नई, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कोजहिकोडे के नाम आते हैं।

उत्तर प्रदेश के कुछ  DMLT कॉलेजों  जैसे, छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी(कानपुर), रामा यूनिवर्सिटी (कानपुर), संस्कृति यूनिवर्सिटी (मथुरा), डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (लखनऊ)  के अतरिक्त कई अन्य कॉलेजो से भी ये कोर्स किया जा सकता है।

DMLT प्रोफेशनल्स, कोर्स के समापन के बाद  पारम्परिक रूप से हॉस्पिटल, क्लीनिक, ब्लड टेस्टिंग लैब अथवा फार्मास्यूटिकल लैब में लेबोरेटरी तकनीशियन, मेडिकल तकनीशियन, पैथोलॉजी तकनीशियन इत्यादि पदों  पर काम करते हैं। जहां ये ब्लड के ट्रांसफ्यूजन जैसे कार्यो के अतिरिक्त, लैब उपकरण जैसे माइक्रोस्कोप आदि के प्रयोगों द्वारा  विभिन्न शारीरिक द्रव्य जैसे ब्लड, यूरिन, सीमेंस इत्यादि का क्लीनिकल ट्रायल करते हैं। आरम्भिक स्तर पर इन्हे INR 2 से INR 3 लाख तक का पैकेज ऑफर किया जाता है, परन्तु पर्याप्त अनुभव प्राप्त करने के बाद ये तकनीशियन INR 5 लाख तक के पैकेज भी प्राप्त करते हैं।

हालाँकि अधिक सैलेरी की अपेक्षा करने वाले प्रोफेशनल को बैचलर डिग्री अवश्य प्राप्त करनी चाहिए, जिससे विभिन्न प्राइवेट सेक्टर्स में सामान पदों पर अधिक आय की जा सके। DMLT के बाद प्रोफेशनल द्वारा किये जाने वाले अंडरग्रेजुएट लेवल के कोर्सेज में BSc मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी, BSc रेडिओग्राफी, BSc इन ECG एंड कार्डिओ वैस्कुलर टेक्नोलॉजी आदि विशेष लोकप्रिय हैं।

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