डिप्लोमा इन बैंकिंग एंड फाइनेंस

किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय प्रणाली का सुचारू रूप से चलना एक बुनियादी आवश्यकता है। बैंक इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। अपने ग्राहकों से  पैसो के लेन देन  के अतरिक्त माल के भुगतान आदि सेवाओं को सुरक्षित एवं कम लागत पर उपलब्ध कराने का भार इसी संस्था द्वारा वहन किया जाता है। बैंकिंग उद्योग कैश, क्रेडिट या अन्य वित्तीय लेन-देन के साथ अतिरिक्त कैश व क्रेडिट को रखने हेतु सुरक्षित स्थान मुहैया करता है। सेविंग एकाउंट्स, सर्टिफिकेट ऑफ़ डिपॉज़िट, ओवरड्राफ्ट, डिस्कॉउंटिंग ऑफ़ बिल्स, एडवांस  एवं चेकिंग एकाउंट्स आदि  बैंकिंग प्रणाली के कुछ मुख्य अवयव हैं। जिसके माध्यम से बैंक, लोन इत्यादि की सुविधा द्वारा व्यापार में निवेश एवं विस्तार अपने ग्राहकों तक पहुँचता है। यह लोन एवं निवेश की प्रक्रिया अर्थव्यवस्था के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान देती है। आधुनिक युग में बैंकिंग एवं मनी मैनेजमेंट सर्विसेज का प्रसार कमर्शियल बैंक, मोर्टगेज कम्पनीज, सेविंग व लोन संस्थान एवं क्रेडिट यूनियन आदि में देखा जा सकता है।     

डिप्लोमा इन बैंकिंग एंड फाइनेंस इस क्षेत्र में किये जाने वाला 1 वर्षीय कोर्स है, जिसमे बैंकिंग, फाइनेंस, इन्सुरेंस, इन्वेस्टमेंट, रिस्क मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन एवं इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी से सम्बंधित आधारभूत विषयों का अध्ययन कराया जाता है। इस कोर्स के माध्यम से कैंडिडेट बैंकिंग के क्षेत्र में एक परिमाणात्मक स्किल्स विकसित कर पाते  हैं, जो कॉर्पोरेट फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, एवं फाइनेंसियल मार्केट में करियर बनाने के लिए  एक ठोस आधार देता है। अंतर्देशीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग के कार्य प्रणाली एवं वित्तीय विश्वसनीयता जैसे महत्वपूर्ण  विषयों से परिचय के साथ, ये इस क्षेत्र में पेशेवर की भांति कार्य करने की दक्षता प्राप्त करते हैं। कोर्स में समावेशित प्रेजेंटेशन, एवं केस स्टडी के द्वारा ये पारस्परिक, संज्ञानात्मक एवं आलोचनात्मक स्किल विकसित करते हैं  जो इन्हें  इस क्षेत्र में कुशलता पूर्वक कार्य करने में सहयोग करती है। एक सर्वे के अनुसार देश में बैंकिंग एवं फाइनेंस सेक्टर एक निरन्तर बढ़ती हुई औद्योगिक इकाई है जहां क्वालिफाइड एवं पेशेवर कैंडिडेट की आवश्यकता दोनों ही, गवर्नमेंट एवं निजी प्राइवेट सेक्टर्स के संस्थानों में निरन्तर बनी रहती है। 

इस कोर्स में दाखिले की अहर्ता बैचलर डिग्री अथवा कक्षा 12 में न्यूनतम 50% अंक की है।अधिकांशतः यह कोर्स ऑनलाइन अथवा कॉरेस्पोंडेंस माध्यमों से किया जाना पसंद किया जाता है | हालाँकि ऐसे कई इंस्टीटूशन अथवा कॉलेज है जो इस स्पेशलाइज़्ड डिप्लोमा कोर्स का संचालन अपने  संस्थानों में कराते  हैं,जैसे नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज लखनऊ, ग्रीनवे इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ देहरादून, इंडो एशिया अकादमी डिग्री कॉलेज बैंगलोर,ऍफ़ टेक कंप्यूटर एजुकेशन नई दिल्ली आदि।  इन इंस्टीटूशन्स में कुछ इंटरमीडिएट की मांग करते है जबकि कुछ ग्रेजुएशन के बाद ही इस कोर्स में दाखिला लेते हैं। कुछ इंस्टीटूशन्स जैसे नर्सी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज बैंगलोर/ नवी मुंबई  या  MIT पुणे आदि इस कोर्स के लिए एंट्रेंस एग्जाम का आयोजन करते हैं। एडमिशन की प्रक्रिया ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यमों से की जाती है। इस कोर्स की औसत  फी INR 10,000 से   INR 50,000 के मध्य होती है।

डिप्लोमा इन बैंकिंग एंड फाइनेंस के सफलता पूर्वक समापन के उपरांत कैंडिडेट के पास जॉब व करियर की संभावनाएं प्रमुख रूप से बैंकिंग, कॉर्पोरेट बैंकिंग, फाइनेंसियल सेक्टर, ऑडिटिंग डिपार्टमेंट, क्रेडिट एडमिनिस्ट्रेशन आदि संस्थाओ में विशेष होती है, जहां ये लोन काउंसलर, सिक्योरिटी एनालिस्ट, इन्वेस्टमेंट बैंकर, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, रिकवरी एजेंट, मार्केट एनालिस्ट,फाइनेंसियल एनालिस्ट, मनी मैनेजर एवं क्रेडिट एंड रिस्क मैनेजर आदि पदों के लिए उपुक्त माने जाते हैं। साधारणतः इन पदों पर इन्हे INR 3 लाख  से 18 लाख तक का पैकेज ऑफर किया जाता है।

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